KNEWS DESK- केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) एक बार फिर विवादों में घिरता नजर आ रहा है। इस बार मामला कक्षा 12वीं के इंप्रूवमेंट परीक्षा परिणाम से जुड़ा है, जिसे लेकर सऊदी अरब में रहने वाले एक छात्र ने सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। छात्र का आरोप है कि बोर्ड की ओर से उसका परिणाम घोषित नहीं किए जाने के कारण उसकी उच्च शिक्षा और कॉलेज प्रवेश की संभावनाएं प्रभावित हो रही हैं।
याचिकाकर्ता प्रांसु जिगरकुमार पटेल ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी याचिका में कहा है कि उन्होंने कक्षा 12वीं की इंप्रूवमेंट परीक्षा के लिए पंजीकरण कराया था और बेहतर अंक प्राप्त करने के उद्देश्य से परीक्षा में शामिल हुए थे। हालांकि क्षेत्रीय परिस्थितियों और सुरक्षा कारणों से कुछ विषयों की परीक्षाएं आयोजित नहीं हो सकीं, जिसके बाद CBSE ने प्रभावित छात्रों के लिए विशेष मूल्यांकन व्यवस्था लागू करने की घोषणा की थी।
विशेष मूल्यांकन योजना का नहीं मिला लाभ
छात्र का कहना है कि बोर्ड ने उन विषयों के लिए वैकल्पिक मूल्यांकन प्रणाली लागू करने की बात कही थी, जिनकी परीक्षाएं नहीं हो सकीं। इसके बावजूद उनका परिणाम अब तक घोषित नहीं किया गया है। जबकि अन्य छात्रों के परिणाम जारी कर दिए गए हैं, उनका परिणाम “रिजल्ट लेटर” श्रेणी में लंबित दिखाया जा रहा है।
याचिका में दावा किया गया है कि यह स्थिति समान परिस्थितियों में मौजूद छात्रों के साथ असमान व्यवहार को दर्शाती है और इससे उनके शैक्षणिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
इंजीनियरिंग प्रवेश पर मंडराया खतरा
छात्र ने बताया कि उन्होंने कंप्यूटर साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े एक बीटेक कार्यक्रम में प्रवेश के लिए आवेदन किया था। विश्वविद्यालय ने निर्धारित समय सीमा के भीतर कक्षा 12वीं का परिणाम जमा करने को कहा था, लेकिन परिणाम उपलब्ध न होने के कारण वह प्रवेश प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए।
याचिकाकर्ता का कहना है कि यदि जल्द परिणाम जारी नहीं किया गया तो उन्हें न केवल वर्तमान प्रवेश सत्र से वंचित होना पड़ सकता है, बल्कि अन्य संस्थानों में आवेदन करने के अवसर भी प्रभावित हो सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग
याचिका में छात्र ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि CBSE और संबंधित अधिकारियों को विशेष मूल्यांकन योजना लागू करते हुए उनका परिणाम घोषित करने का निर्देश दिया जाए। साथ ही उन विषयों के लिए विशेष परीक्षा या पुनर्परीक्षा आयोजित करने पर भी विचार किया जाए, जिनकी परीक्षाएं सुरक्षा कारणों से रद्द करनी पड़ी थीं।
छात्र का तर्क है कि केवल निजी अभ्यर्थी होने के आधार पर उन्हें अन्य प्रभावित विद्यार्थियों से अलग नहीं माना जा सकता। उन्होंने अदालत से यह भी अनुरोध किया है कि उनके विद्यालय के आंतरिक मूल्यांकन रिकॉर्ड को आधार बनाकर शेष विषयों का मूल्यांकन किया जाए।
मामले पर टिकी छात्रों की नजर
यह मामला केवल एक छात्र तक सीमित नहीं माना जा रहा है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है, जहां असाधारण परिस्थितियों के कारण परीक्षाएं प्रभावित होती हैं और छात्रों के परिणाम लंबित रह जाते हैं। अब सभी की नजर अदालत की अगली सुनवाई और CBSE के जवाब पर टिकी हुई है।