Knews Desk– भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की आगामी मौद्रिक नीति बैठक से पहले यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या केंद्रीय बैंक रेपो रेट में कोई बदलाव करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच आरबीआई फिलहाल ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है।
हाल के महीनों में महंगाई दर में कुछ नरमी देखने को मिली है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय हालात अभी भी चिंता का विषय बने हुए हैं। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। यदि तेल की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं तो इसका सीधा असर भारत की महंगाई और आयात लागत पर पड़ सकता है। यही वजह है कि आरबीआई फिलहाल सतर्क रुख अपनाने के पक्ष में दिखाई दे रहा है।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि केंद्रीय बैंक अभी आर्थिक विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश करेगा। रेपो रेट में कटौती से कर्ज सस्ता हो सकता है, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए जल्दबाजी में कोई फैसला लेने से जोखिम बढ़ सकता है।
वर्तमान में रेपो रेट ऐसे स्तर पर है जहां बैंकिंग सिस्टम और अर्थव्यवस्था को स्थिरता मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई पहले वैश्विक घटनाक्रम, मानसून की स्थिति और घरेलू महंगाई के आंकड़ों का आकलन करेगा, उसके बाद ही किसी बड़े बदलाव पर विचार किया जाएगा।
बाजार की नजर अब आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक पर टिकी है। निवेशकों, उद्योग जगत और आम उपभोक्ताओं को उम्मीद है कि केंद्रीय बैंक अपने फैसले में आर्थिक स्थिरता को प्राथमिकता देगा। फिलहाल संकेत यही हैं कि पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता।