उत्तराखंड की विश्वविख्यात चारधाम यात्रा का दौर चल रहा है, देश विदेश से लाखों श्रद्धालु प्रदेश आगमन कर चारधाम यात्रा का आनंद ले रहे है. हर वर्ष रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु चारधाम यात्रा में पहुंचते रहे हैं, राज्य सरकार को भी इस चारधाम यात्रा का हर वर्ष इंतज़ार रहता है, क्योंकि इस यात्रा के चलते स्थानीय लोगो को रोजगार का अवसर भी प्राप्त होता है, जिससे राज्य की आर्थिकी में भी काफी इज़ाफ़ा होता है, यही कारण है कि चारधाम यात्रा को प्रदेश की आर्थिकी में रीड की हड्डी भी माना जाता है. वही चारधाम यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु देवभूमि में दर्शन करने आते है, और इन सभी श्रद्धालुओं के दर्शन और चार धाम के अंतर्गत आने वाले सभी मंदिरों के पूजा-पाठ, दान, और मंदिरों की संपत्ति का रखरखाव करने के लिए मंदिर समितियों का निर्माण किया गया है. इन समितियों में मुख्य समिति बद्री-केदार मंदिर समिति यानी की BKTC की भी मुख्य भूमिका रहती है, यह समिति उत्तराखंड सरकार का एक स्वायत्त निकाय है. यह समिति भगवान विष्णु को समर्पित बद्रीनाथ धाम और भगवान शिव को समर्पित केदारनाथ धाम सहित लगभग 45 अन्य मंदिरों का प्रबंधन करती है. लेकिन समय समय पर यह समिति चर्चाओं में आती रही है, और एक बार फिर दरअसल, एक RTI के जरिए जानकारी सामने आई कि उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी की बेटी व भाजपा नेता नेहा जोशी के साल 2025 में केदारनाथ प्रवास के दौरान उनकी यात्रा और विशेष व्यवस्थाओं के लिए दो दिन में 60 हजार रुपए खर्च किए गए. इसके अलावा केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल समेत कई अन्य नेताओं की मेहमाननवाजी में भी इस तरह बीकेटीसी का पैसा खर्च किया गया.इस आरोपों के बाद खुद नेहा जोशी और रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन की ओर से बीकेटीसी अध्यक्ष को जांच के लिए पत्र लिखा गया था. अब इस मामले में बदरी-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने एक जांच समिति गठित कर दी है, जो इस मामले के सभी पहलुओं पर गहनता से जांच करेगी.चार सदस्य जांच समिति में बीकेटीसी के सीईओ और वित्त नियंत्रक के अलावा दो अन्य लोग है. जांच समिति को 20 दिन का समय दिया गया है. ताकि जांच के बाद रिपोर्ट जल्द से जल्द शासन को भेजने के साथ ही सार्वजनिक की जा सके.जिस पर जम कर राजनीति इस समय अपने चरम पर है.
अक्सर चर्चाओं में रहने वाली बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) एक बार फिर गंभीर आरोपों के चलते सुर्खियों में है. इस बार मामला बेहद गंभीर है. आरोप है कि श्रद्धालुओं की ओर से दानपात्र में चढ़ाई गई राशि का इस्तेमाल नेताओं, उनके परिजनों और खास लोगों की आवभगत में किया गया. इन आरोपों के बाद बीकेटीसी ने मामले को गंभीरता लिया और इसलिए बीकेटीसी ने मामले की जांच के आदेश देते हुए एक जांच समिति का गठन भी किया है.इसके साथ ही बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है. वर्तमान समय में क्या सही है और क्या गलत यह कहना उचित नहीं है. फिलहाल तो यही कहा जा सकता है, कि ये एक बड़ा बड़ा षड्यंत्र है, जिसके तहत सरकार और मंदिर समिति की छवि को खराब करने का प्रयास किया गया है. ऐसे में जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो पाएगी. जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.जिस पर राजनीति अपने चरम पर है तो वही तीर्थ पुरोहितों ने भी अपने नाराजगी दर्ज कराई है.
दरअसल, RTI एक्टिविस्ट एवं अधिवक्ता विकेश नेगी ने एक आरटीआई लगाई थी. आरटीआई के तहत बीकेटीसी के खर्चों की जानकारी मांगी गई थी, जिसके तहत पता चला कि 2025 की यात्रा के दौरान कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी की बेटी व बीजेपी महिला नेता नेहा जोशी के केदारनाथ प्रवास के दौरान बीकेटीसी ने करीब 60 हजार रुपए खर्च किए हैं. इस तरह केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल के नाम पर लगभग 37 हजार 500 रुपये खर्च दर्शाए जाने का दावा किया गया है. इन दोनों के अलावा कई और नेताओं के भी नाम हैं. इसलिए इस मामले में अब जांच के आदेश दिए गए हैं. क्योंकि अधिकांश नेताओं का कहना है कि उन्होंने अपने खर्च पर केदारनाथ यात्रा की थी.ऐसे में सवाल उठाने तो लाजमी है की आखिर दान में मिला पैसा ही ये राजनेता नहीं छोड़ रहे है.तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है.हाल तब है की ये वो रसूकदार है जिनकी प्रदेश में बेहतर छवि है.ऐसे में भगवान का पैसे भगवन को मिल भी पायेगा या ये भी भष्टाचार की भेट ही चढ़ जायेगा ये देखना अभी बाकि है।