शीर्ष नेताओं दौर,2027 की ओर ! 

उत्तराखंड डेस्क, उत्तराखंड में इन दिनों बढ़ते तापमान के बीच राजनितिक हलचल भी बढ़ती हुई नज़र आ रही है. हलचल हो भी क्यों न चुनावी वर्ष जो है, जिसके चलते सभी राजनितिक दल अभी से ताबड़तोड़ मेहनत करते दिखाई दे रहे है. सभी दल अपनी अपनी तैयारियों में लगे हुए है, लगातार सदस्यता अभियान चल रहे है, और आपसी बयानबाजी भी देखने को मिल रही है, मुख्य रूप से कांग्रेस पार्टी और भाजपा जमकर जद्दोजहद करते दिखाई दे रहे है. जहाँ एक ओर भाजपा अपनी उपलब्धियों के जरिये जीत के दावे कर रही है वही कांग्रेस सत्ताधारी सरकार की कमियों को गिनवाने का काम कर रही है. बीते दिनों जहाँ केंद्रीय मंत्रियों ने आकर भाजपा की पीठ थपथपाने का कार्य किया वही कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी द्वारा संगठन को मजबूती प्रदान करने और सरकार की कमियों को जनता तक पहुंचाने का काम किया गया. आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए दोनो दल कमर कस्ते दिखाई दे रहे है. इसी बीच अब एक बार फिर दोनोें दल सक्रिय दिखाई दे रहे है, जिसके चलते अब दोनो दल पुनः शीर्ष नेताओं के दमपर मिशन 2027 को निहारते भी नज़र आ रहे है.आपको बता दे, की आगामी 29 मई 2026 को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन तीन दिवसीय दौरे पर प्रदेश में आ रहे है, और प्रदेश भाजपा उनके आगमन के लिए उत्सुक भी नज़र आ रही है. उनका यह दौरा राज्य की सभी सीटों पर जीत हासिल करने की दृष्टि से भाजपा द्वारा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, साथ ही नितिन नबीन अपने दौरे के दौरान उन सभी सीटों पर विशेष समीक्षा करेंगे जहां पार्टी की स्थिति कमजोर है. वही ऐसे में कांग्रेस कहा पीछे हटने वाली है, चुनावी साल होने के कारण कांग्रेस पार्टी के युवराज राहुल गांधी का उत्तराखंड दौरा प्रस्तावित हो गया है. बताया जा रहा है कि राहुल गांधी ने स्वयं उत्तराखंड आकर कार्यकर्ताओं से संवाद करने और जनसभा को संबोधित करने की इच्छा जताई है, जिसके बाद पार्टी स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं और बैठकों का दौर जारी है. प्रदेश कांग्रेस के मुताबिक प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत राहुल गांधी की एक जनसभा अल्मोड़ा या चंपावत में और दूसरी पौड़ी में होनी तय है. वही साथ ही प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा का भी एक बार फिर प्रदेश दौरा माना जा रहा है, इससे पहले भी वह इस वर्ष दो बार प्रदेश दौरा कर चुकी है और अब प्रदेश के कुमाऊं मंडल में दूसरी बार दौरा करने आ रही है. कांग्रेस को विश्वास है कि उनके शीर्ष नेताओं के मार्गदर्शन से निश्चित ही कांग्रेस को सकारात्मक परिणाम मिल सकते है. कुलमिलाकर दोनों पार्टियां अपने शीर्ष नेताओं के प्रदेश दौरे को लेकर उत्साहित दिखाई पड़ रही है, लेकिन शीर्ष नेताओं के आगमन से पहले आपसी बयानबाजी और पलटवार का सिलसिला अभी से देखने को मिलने लगा है.

प्रदेश में आगामी वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव होने जा रहे है, जिसके चलते सभी राजनितिक दल अभी से सक्रिय नज़र आने लगे है. चुनावी वर्ष को देखते हुए भाजपा और कांग्रेस अब अपने शीर्ष नेताओं का सहारा लेती नज़र आ रही है. उत्तराखंड के चुनावी युद्ध मैदान में अब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन तो वही कांग्रेस की ओर से कांग्रेस पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष युवराज राहुल गांधी और एक बार फिर प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा को योद्धाओं के रूप में मैदान में उतरने जा रहे है. दोनों पार्टियों का मानना है की शीर्ष नेताओं के प्रदेश दौरे से निश्चित ही सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे और 2027 के चुनावों में जीत भी हासिल होगी. लेकिन शीर्ष नेताओं के आगमन से पहले आपसी बयानबाज़ी अभी से होती दिखने लगी है. जहाँ एक ओर कांग्रेस राहुल गांधी के प्रस्तावित दौरे को लेकर उत्साहित होकर तैयारी कर रही है, वही भाजपा कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के दौरे पर तंज भी कस्ती हुई दिखाई दे रही है.

कुल मिला कर उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव भले अभी करीब एक साल दूर हों, लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने, बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और पिछली बार कमजोर रही सीटों पर विशेष रणनीति बनाने के लिए पार्टी हाईकमान अब सीधे मैदान में उतर रहा है.वही कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी के कई दौरे गढ़वाल और कुमाऊ में अब तक हो चुके है,अब दौरे का इंतजार है,तो सिर्फ अपने शीर्ष नेता राहुल गाँधी का जो एक बार पहाड़ पर अपनी दस्तक दे, कर पार्टी में जीत की जान फुकेगे,साथ ही अब भाजपा का सबसे बड़ा फोकस उन विधानसभा सीटों पर है जहां पिछली बार पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था या जहां जीत का अंतर बहुत कम रहा था. ऐसे क्षेत्रों में संगठन को फिर से सक्रिय किया जा रहा है. बूथ स्तर तक डेटा तैयार किया गया है. स्थानीय समीकरणों का अध्ययन हो रहा है. पार्टी नेताओं का मानना है कि 2027 चुनाव में छोटे अंतर से जीत-हार तय हो सकती है, इसलिए हर बूथ की स्थिति मजबूत करना जरूरी है. इसी वजह से राष्ट्रीय अध्यक्ष को हारी हुई सीटों का विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया जाएगा. जिलों से फीडबैक लिया जा चुका है. क्षेत्रीय नेताओं से रिपोर्ट मांगी गई है.प्रदेश में मानो चुनावी बिगुल बज चुका है.हर राजनैतिक पार्टियों के सामने सिर्फ 2027 करो या मरो की स्थिति जैसा प्रतीत हो रहा है.

      

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