उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट – पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण देश प्रदेश भी प्रभावित होते नज़र आ रहे हैं, हालांकि केंद्र सरकार के साथ कंधे से कंधा मिला राज्य सरकार स्थिति को काफी हद तक नियंत्रण में किये हुए है, लेकिन इस तनाव के चलते बढ़ती महंगाई ने सभी को चिंता में डाल दिया है. खासकर गरीब, मजदूर, मध्यम वर्ग और प्राइवेट सेक्टरों में काम करने वाले लोगों पर इसका अधिक प्रभाव पड़ता दिखाई दे रहा है, और इन्हीं सब विषयों के कारण काफी आक्रोश प्राइवेट कंपनी और फैक्ट्रियों में कम वेतन पर कार्य कर रहे लोगों में भी बीते कुछ दिनों से देखने को मिल रहा है. बात है उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की जहाँ औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूरों का आक्रोश दिन ब दिन बढ़ रहा है, इस आक्रोश की वजह यही है कि इस बढ़ती महंगाई में न्यूनतम वेतन को मौजूदा 12 हजार रुपये से बढ़ाकर 20 हजार रुपये प्रति माह किया जाये, क्योंकि दिन-रात मेहनत के बदले मिल रही मजदूरी से वर्तमान महंगाई के दौर में घर चलाना मुश्किल हो गया है, जो स्वाभाविक भी नज़र आता है. वहीं इस विषय ने प्रदेश की राजनीति में अलग ही प्रकार से तूल पकड़ लिया है, आपको बता दें, बीते दिनों पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता हरीश रावत द्वारा इस विषय पर मौन धारण किया गया, साथ ही हरीश रावत मौन धारण करने से पहले जमकर सरकार को घेरते भी दिखाई दिये. हरीश रावत के अनुसार महंगाई की मार से श्रमिकों की कमर टूट चुकी है, और मौजूदा वेतन में परिवार चलाना तो दूर, खुद का गुजारा करना भी मुश्किल हो रहा है, आगे महंगाई और बढ़ने की आशंका है. उन्होंने अपने उपवास को संघर्षरत श्रमिकों को समर्पित किया. अपने मौन से पहले हरदा सरकार से अपील करते हुए भी नज़र आये कि सरकार उद्योगपतियों और नियोक्ताओं से बातचीत कर श्रमिकों का वेतन बढ़ाएं व श्रमिकों के हित में ठोस निर्णय ले. इससे पहले भी कई बार कई विषयों को लेकर हरिश रावत इस प्रकार के मौन करते नज़र आये हैं, लेकिन जहाँ एक ओर हरिश रावत अपने मौन के ज़रिये अपनी संवेदनाएं प्रकट करते दिखाई दिये वहीं, सत्ता दल भाजपा हरदा के मौन को हास्यस्पद करार करती नज़र आ रही है, भाजपा का मानना है कि हरिश रावत द्वारा मौन व्रत केवल उनके अपने हित के लिए ही किया जाता आया है, साथ ही वास्तविकता क्या है वो कहीं नज़र नही आती है. वहीं सत्ता पक्ष द्वारा हरिश रावत के मौन व्रत पर तंज कसने के बाद राजनितिक गलियारों में आपसी बयानबाज़ी शुरु हो गई है, जिसके चलते एक नई बहस भी देखने को मिल रही है.
देवभूमि में बढ़ती महंगाई से गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों की रसोई का बजट गड़बड़ा गया है. एक माह में एक परिवार के महीने के राशन की कीमत 600 से 1000 हजार रुपए तक बढ़ चुकी है. जिसका असर चार धाम यात्रा सहित अन्य पर्यटक स्थलों पर भी देखने को मिल रहा है.वहीं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता हरीश रावत ने हाल ही में महंगाई, विशेष रूप से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने और बिजली-पानी की दरों में लगातार बढ़ोतरी के विरोध में देहरादून में मौन व्रत रखा है। उन्होंने सरकार की आर्थिक नीतियों को आम जनता की कमर तोड़ने वाला करार दिया है। साथ ही अन्य विपक्षी दलों ने भी बढ़ती महंगाई के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराया है, और हरीश रावत का समर्थन किया है. हरीश रावत के मौन पर भाजपा ने पलटवार किया और भाजपा का मानना है. कि महंगाई को लेकर के तो रावत ने यह नहीं देखे कि उनकी पेंशन में भी बढ़ोतरी हो रही है. उनके बच्चों के कारोबार में भी बढ़ोतरी हो रही है. और अगर महंगाई का विरोध करना था तो उत्तराखंड के परिपेक्ष में जाते या हरीश रावत अपनी पार्टी के नेताओं को मनाने के लिए जाते, ये समझ से बाहर है, क्योंकि उनका हास्य मौन हर कोई जानता है.
हालिया विरोध: उन्होंने देहरादून स्थित अपने आवास पर महंगाई और श्रमिकों की समस्याओं के खिलाफ एक घंटे का “मौन व्रत” रखा।
बिजली और पानी: इससे पहले, चैत्र नवरात्रि के दौरान उन्होंने बिजली और पानी की दरों में प्रस्तावित बढ़ोतरी के खिलाफ भी सांकेतिक मौन उपवास किया था।
आर्थिक नीतियां: हरीश रावत का आरोप है कि सरकार की गलत आर्थिक नीतियों और ‘गल्फ वॉर’ के कारण आम उपयोग की वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं।
आम जनता पर असर: उनके अनुसार, इन वजहों से आम आदमी का बजट बिगड़ गया है और गरीबों तथा कमजोर वर्गों पर इसका सबसे बुरा असर पड़ रहा है।
उत्तराखंड कैबिनेट बैठक में ऊर्जा और ईंधन बचत को लेकर तमाम महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए. जिसके तहत एक दिन ‘नो व्हीकल डे’ होगा. इसके अलावा मुख्यमंत्री एवं मंत्री गणों के फ्लीट में शामिल होने वाले वाहनों की संख्या को आधा किया जाएगा. सरकारी कर्मचारी सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करेंगे. एक तरफ सरकार पेट्रोल डीजल,और सोने की खरीद से बचने की सलाह आम जनता को दे रही है। वहीं इसका असर प्रदेश में बढ़ती महंगाई में भी देखा जा रहा है. जिसका असर खासकर चार धाम यात्रा मार्गो पर पर्यटकों को झेलना पड़ रहा है.जिसको सीधे तौर पर कहा जा सकता है. कि हर साल होने वाली चार धाम यात्रा पिछले सालों के भाति महँगी हो चली है. वही हरीश रावत का महंगाई के विरोध में मौन उपवास भाजपा को भले ही हस्मे लग रहा हो, लेकिन आम जनता को हरीश का ये विरोध जताने का तरीका इस समय महगाई पर मरहम लगाने से कम भी नहीं लग रहा है.