भोजशाला पर ASI का नया आदेश: हिंदू पक्ष को 365 दिन बिना रोक टोक पूजा की अनुमति

Knews Desk– भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद धार स्थित भोजशाला को लेकर नया प्रशासनिक आदेश जारी किया है। इस आदेश में हिंदू समुदाय को परिसर में पूजा-अर्चना और धार्मिक गतिविधियों के लिए “अनरिस्ट्रिक्टेड एक्सेस” यानी निर्बाध प्रवेश देने की बात कही गई है।

इस फैसले के बाद अब भोजशाला परिसर में वर्ष के सभी 365 दिन पूजा और आराधना की अनुमति का मार्ग खुल गया है। हालांकि, परिसर को संरक्षित स्मारक के रूप में ही बनाए रखा जाएगा और इसका संचालन प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल एवं अवशेष अधिनियम (AMASR Act, 1958) के तहत ही किया जाएगा। शनिवार शाम जारी आदेश में ASI ने पहली बार इस स्थल को “राजा भोज द्वारा स्थापित भोजशाला एवं संस्कृत पाठशाला” के रूप में उल्लेखित किया है। इसके साथ ही पूर्व में प्रयुक्त “कमाल मौला मस्जिद” शब्द का उल्लेख नए आदेश से हटा दिया गया है।

ASI ने अपने आदेश में हाई कोर्ट के हालिया निर्णय का हवाला देते हुए कहा है कि यह स्थल ऐतिहासिक रूप से संस्कृत शिक्षा और शोध का केंद्र रहा है और इसे देवी वाग्देवी (सरस्वती) को समर्पित माना गया है। इधर, धार से भाजपा सांसद और केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर ने दावा किया है कि वाग्देवी की प्रतिमा को वर्ष 2017-18 में ब्रिटिश म्यूजियम द्वारा लौटाने पर सहमति दी गई थी, लेकिन कानूनी अड़चनों के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।

उन्होंने बताया कि पूर्व में सुब्रमण्यम स्वामी ने इस मामले को लेकर ब्रिटिश म्यूजियम से बातचीत की थी और भोजशाला का कई बार दौरा भी किया था। उस समय म्यूजियम ने शर्त रखी थी कि प्रतिमा को उसी स्थान पर स्थापित किया जाए, जहां वह पहले थी, लेकिन मामला कोर्ट में लंबित होने के कारण यह संभव नहीं हो पाया। अब हाई कोर्ट के ताजा आदेश के बाद प्रतिमा की पुनर्स्थापना का रास्ता साफ होने का दावा किया जा रहा है। सांसद ने कहा कि वह इस विषय पर केंद्र सरकार से चर्चा करेंगी।

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