पुरुषों के स्पर्म में लंबे समय तक रह सकता है हंता वायरस, ठीक होने के बाद भी संक्रमण फैलने की आशंका

Knews Desk– दुनिया अभी पूरी तरह कोरोना महामारी के प्रभाव से उबरी भी नहीं है कि हंता वायरस को लेकर एक नई रिसर्च ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह वायरस शरीर में संक्रमण ठीक होने के कई साल बाद तक भी मौजूद रह सकता है, जिससे इसके लंबे समय तक प्रभावी रहने की आशंका जताई जा रही है।

पुरुषों के स्पर्म में ‘घर’ बना लेता है खतरनाक हंता वायरस

नई स्टडी में दावा किया गया है कि हंता वायरस पुरुषों के प्रजनन तंत्र, खासकर स्पर्म में लगभग 6 साल तक जीवित रह सकता है। इसके चलते शारीरिक संबंधों के माध्यम से संक्रमण फैलने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अभी तक इस तरह के संक्रमण का कोई बड़ा प्रमाणित मामला सामने नहीं आया है, लेकिन संभावनाओं को गंभीरता से देखा जा रहा है।

हंता वायरस मुख्य रूप से चूहों और अन्य कृंतकों के जरिए इंसानों में फैलता है। संक्रमित जानवरों के मूत्र, मल या लार के संपर्क में आने से यह वायरस मनुष्यों तक पहुंच सकता है। शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू जैसे होते हैं, जिनमें बुखार, शरीर दर्द, सिरदर्द, पेट खराब होना और हल्की खांसी शामिल हैं। कई मामलों में संक्रमित व्यक्ति में कोई स्पष्ट लक्षण भी नहीं दिखाई देते, जिससे इसका पता लगाना मुश्किल हो जाता है।

स्पर्म में वायरस का लंबे समय तक रहना

रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि एक मरीज के शरीर के खून, मूत्र और श्वसन तंत्र में संक्रमण के 71 महीने बाद भी वायरस का कोई निशान नहीं मिला, लेकिन उसके स्पर्म में वायरस सक्रिय अवस्था में मौजूद था। इस खोज ने विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है और वायरस के लंबे समय तक बने रहने की क्षमता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि पुरुषों के टेस्टिस वायरस के लिए एक प्रकार का “सेफ हाउस” बन सकते हैं। शरीर की इम्यूनिटी सिस्टम आमतौर पर प्रजनन तंत्र को सुरक्षित रखने के लिए सीमित प्रतिक्रिया देती है, ताकि प्रजनन प्रक्रिया प्रभावित न हो। इसी कारण वायरस वहां छिपकर लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं और इम्यून सिस्टम उन्हें पूरी तरह खत्म नहीं कर पाता।

विशेषज्ञों ने इबोला वायरस के मामलों का भी उदाहरण दिया है, जिसमें ठीक हो चुके मरीजों से वर्षों बाद संक्रमण फैलने के प्रमाण मिले थे। इसी आधार पर वैज्ञानिक यह संभावना जता रहे हैं कि हंता वायरस भी समान व्यवहार कर सकता है, हालांकि अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और रिसर्च एजेंसियों ने सुझाव दिया है कि हंता वायरस से ठीक हुए मरीजों को लंबे समय तक सतर्क रहने की आवश्यकता है। कुछ विशेषज्ञ इबोला सर्वाइवर्स जैसी गाइडलाइंस अपनाने की सलाह दे रहे हैं, जिसमें सुरक्षित यौन संबंध, नियमित स्वास्थ्य जांच और स्पर्म टेस्टिंग शामिल है। हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ओर से अभी इस पर कोई आधिकारिक प्रोटोकॉल जारी नहीं किया गया है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि आगे और रिसर्च की जरूरत है ताकि इस वायरस की प्रकृति और उसके दीर्घकालिक प्रभावों को बेहतर तरीके से समझा जा सके।

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