Knews Desk– केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने NEET-UG 2026 को लेकर कई अहम घोषणाएं की हैं। उन्होंने बताया कि परीक्षा दोबारा 21 जून को आयोजित की जाएगी। यह फैसला 3 मई को हुई परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं और शिकायतों के बाद लिया गया, जिसे 12 मई को रद्द कर दिया गया था। सरकार ने इस पूरे मामले में सख्त रुख अपनाते हुए ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति की बात कही है और जांच की जिम्मेदारी सीबीआई को सौंपी गई है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार नहीं चाहती कि किसी भी तरह की गड़बड़ी या शिक्षा माफिया छात्रों के भविष्य को प्रभावित करें। उन्होंने बताया कि 7 मई को परीक्षा से जुड़े पेपर लीक या गेस पेपर नेटवर्क से संबंधित शिकायतें सामने आई थीं, जिसके बाद जांच शुरू की गई। प्रारंभिक जांच के बाद 12 मई को परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया गया।

धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि इस मामले की गहन जांच के लिए राधाकृष्णन कमेटी का गठन किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार सभी पक्षों की राय को ध्यान में रखकर आगे बढ़ रही है और छात्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार सोशल मीडिया पर फैल रहे भ्रामक संदेशों को लेकर भी सतर्क है और इस तरह की अफवाहों पर रोक लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं। सीबीआई को जांच के निर्देश दिए गए हैं और एजेंसी पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच करेगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। शिक्षा मंत्री ने यह भी घोषणा की कि इस बार छात्रों को अपनी पसंद का परीक्षा शहर चुनने का अवसर दिया जाएगा। इसके लिए एक विशेष विंडो खोली जाएगी, जिसमें उम्मीदवार अपनी सुविधा के अनुसार शहर का चयन कर सकेंगे। यह प्रक्रिया परीक्षा से पहले पूरी कर ली जाएगी ताकि छात्रों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
उन्होंने बताया कि परीक्षा का समय भी पहले की तुलना में थोड़ा बदला गया है, जो अब दोपहर 2 बजे से 5:15 बजे तक रहेगा। एडमिट कार्ड 14 जून तक सभी छात्रों को उपलब्ध करा दिए जाएंगे। इसके अलावा, रद्द की गई परीक्षा के लिए ली गई फीस वापस की जाएगी और दोबारा परीक्षा के लिए किसी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए लगातार सुधार कर रही है। NTA को और मजबूत किया जा रहा है ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना को खत्म किया जा सके। उन्होंने दोहराया कि सरकार का उद्देश्य योग्य छात्रों के हितों की रक्षा करना और परीक्षा प्रणाली में पूर्ण विश्वास बहाल करना है।