Knews Desk– प्रदेश के सबसे लंबे गंगा एक्सप्रेसवे पर अब मुफ्त सफर का दौर खत्म हो गया है। रात 12 बजे से टोल वसूली शुरू हो गई। रात 12 बजे से इस एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली शुरू कर दी गई है। इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उद्घाटन के बाद 15 दिनों तक इसे टोल शुल्क मुक्त रखने का एलान किया था, जिसकी अवधि बृहस्पतिवार रात समाप्त हो गई।
टोल शुल्क लागू होने के साथ ही अब एक्सप्रेसवे पर यात्रा करने वाले वाहनों से निर्धारित दरों के अनुसार शुल्क लिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) के एसीईओ श्रीहरि प्रताप शाही ने टोल वसूली शुरू होने की पुष्टि करते हुए बताया कि इसके लिए सभी तैयारियां पहले से पूरी कर ली गई थीं।

इस एक्सप्रेसवे पर क्लोज्ड टोल सिस्टम लागू किया गया है, जिसके तहत वाहन जितनी दूरी तय करेगा, उतना ही टोल देना होगा। इसके लिए अत्याधुनिक मल्टी लेन फ्री फ्लो (MLFF) तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इस व्यवस्था में वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकना नहीं पड़ेगा। प्रवेश बिंदु पर कैमरे और सेंसर वाहन की एंट्री को रिकॉर्ड करेंगे और निकास बिंदु पर तय दूरी के अनुसार टोल की गणना की जाएगी।
नई दरों के अनुसार, कार, जीप और वैन जैसे हल्के वाहनों के लिए टोल 2.55 रुपये प्रति किलोमीटर निर्धारित किया गया है। इस हिसाब से मेरठ से प्रयागराज तक पूरे 594 किलोमीटर के सफर के लिए कार चालकों को लगभग 1795 रुपये तक टोल चुकाना पड़ सकता है। वहीं, बस और ट्रक जैसे भारी वाहनों के लिए यह दर 8.20 रुपये प्रति किलोमीटर तय की गई है।
टोल लागू होने के बाद गंगा एक्सप्रेसवे पर अब पूरी तरह से व्यावसायिक संचालन शुरू हो गया है। पहले 15 दिनों तक यात्रियों को मुफ्त यात्रा की सुविधा दी गई थी, जिससे बड़ी संख्या में लोगों ने इस एक्सप्रेसवे का उपयोग किया। लेकिन अब टोल वसूली शुरू होने के साथ ही यात्रा की लागत भी बढ़ गई है।
अधिकारियों के अनुसार, इस नई प्रणाली से टोल संग्रह अधिक पारदर्शी और डिजिटल तरीके से किया जाएगा। इससे समय की बचत के साथ-साथ ट्रैफिक भी सुचारू रहेगा। हालांकि, लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए अब यह मार्ग पहले की तुलना में महंगा हो गया है।