KNEWS DESK- नई दिल्ली में आयोजित BRICS देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान Seyed Abbas Araghchi ने अमेरिका और इजरायल पर तीखा हमला बोला। अपने भावुक और आक्रामक संबोधन में उन्होंने कहा कि ईरान कभी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगा और उसकी लड़ाई सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे “ग्लोबल साउथ” के लिए है।
बैठक के दौरान अराघची ने कहा कि पिछले एक साल में ईरान पर दो बड़े हमले हुए, जिन्हें अमेरिका और इजरायल ने सही ठहराने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि इन हमलों को लेकर झूठे दावे किए गए, जो अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के आकलन के भी खिलाफ हैं।
उन्होंने कहा, “क्या ईरान ने अपनी आजादी के सिद्धांतों से पीछे हटकर साम्राज्यवादी ताकतों के सामने घुटने टेक दिए? जवाब साफ है- हमने ऐसा नहीं किया और कभी नहीं करेंगे।”
ईरानी विदेश मंत्री ने BRICS देशों से पश्चिमी देशों की “मनमानी” के खिलाफ एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का राजनीतिक इस्तेमाल बंद होना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने वालों को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।
अराघची ने अमेरिका और इजरायल पर “गैरकानूनी हमलों” का आरोप लगाते हुए BRICS देशों से इसकी खुलकर निंदा करने की मांग की।
अपने भाषण में अराघची ने ईरान के संघर्ष को वैचारिक लड़ाई बताते हुए कहा कि पश्चिमी ताकतें उभरते हुए “ग्लोबल साउथ” को रोकना चाहती हैं।
उन्होंने कहा, “गिरती हुई साम्राज्यवादी ताकतें समय को पीछे ले जाना चाहती हैं और गिरते वक्त बुरी तरह हमला कर रही हैं।”
उन्होंने BRICS को एक नई और ज्यादा न्यायपूर्ण वैश्विक व्यवस्था का प्रतीक बताया, लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि यह व्यवस्था अभी नाजुक स्थिति में है।
अराघची ने पश्चिमी देशों पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में ऐसी घटनाओं को भी स्वीकार किया जा रहा है जिन्हें पहले अकल्पनीय माना जाता था।
उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों की चुप्पी ने “मनमानी की संस्कृति” को बढ़ावा दिया है और अब इसे मिलकर रोकने की जरूरत है।
हालांकि भाषण काफी सख्त था, लेकिन अराघची ने कूटनीति और बातचीत का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि ईरान किसी भी मुद्दे का सैन्य समाधान नहीं मानता और सम्मानजनक बातचीत के लिए हमेशा तैयार है।
उन्होंने कहा, “हम दबाव और धमकी के आगे नहीं झुकते, लेकिन सम्मान की भाषा का जवाब सम्मान से देते हैं।”
नई दिल्ली में हुए इस बयान ने भारत की स्थिति को भी संवेदनशील बना दिया है। भारत के रिश्ते एक तरफ ईरान से हैं, तो दूसरी ओर अमेरिका और पश्चिमी देशों से भी मजबूत रणनीतिक संबंध बने हुए हैं। अब दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि BRICS देश ईरान की मांग पर अमेरिका और इजरायल को लेकर कोई सामूहिक रुख अपनाते हैं या नहीं।