कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की आहट, सिद्धारमैया बोले- शिवकुमार को सीएम बनाने की मांग में कुछ गलत नहीं

डिजिटल डेस्क- कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर नेतृत्व परिवर्तन और कैबिनेट फेरबदल की अटकलों ने जोर पकड़ लिया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मंगलवार को डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने की मांग और हालिया चुनावी नतीजों पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कई बड़े बयान दिए। मुख्यमंत्री के इस रुख ने राज्य कांग्रेस के भीतर चल रही ‘पावर शेयरिंग’ की चर्चाओं को नई हवा दे दी है, खासकर तब जब सरकार के ढाई साल का कार्यकाल करीब आ रहा है। कैबिनेट में संभावित फेरबदल को लेकर पूछे गए सवाल पर सिद्धारमैया ने बेहद सधे हुए अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंत्रियों के विभागों में बदलाव या नए चेहरों को शामिल करने का अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान ही लेगा। मुख्यमंत्री ने कहा, “जब भी हमें दिल्ली बुलाया जाएगा, हम वहां जाकर शीर्ष नेतृत्व से चर्चा करेंगे। फिलहाल सब कुछ आलाकमान के विवेक पर निर्भर है।”

डीके शिवकुमार की ताजपोशी पर बड़ा बयान

सबसे चौंकाने वाला बयान उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने की मांग पर आया। उनके समर्थकों द्वारा लगातार उठाई जा रही इस मांग पर सिद्धारमैया ने कहा, “समर्थकों का अपने नेता के लिए मुख्यमंत्री पद मांगना गलत नहीं है।” राजनीतिक विश्लेषक इस बयान को काफी महत्वपूर्ण मान रहे हैं। माना जा रहा है कि 2023 की जीत के वक्त सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री पद का जो ‘कथित’ समझौता हुआ था, नवंबर 2025 में उसके ढाई साल पूरे होने जा रहे हैं। ऐसे में सिद्धारमैया का यह बयान किसी बड़े बदलाव का संकेत हो सकता है।

अन्य राज्यों के चुनावी नतीजों पर विश्लेषण

सिद्धारमैया ने पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के चुनावी नतीजों पर भी अपनी राय रखी। ममता बनर्जी की हार पर उन्होंने कहा कि 15 साल तक सत्ता में रहने के बाद ‘एंटी-इंकंबेंसी’ (सत्ता विरोधी लहर) एक स्वाभाविक कारण हो सकता है। साथ ही उन्होंने मतदाता सूची से 91 लाख नाम हटाए जाने के दावों को भी हार का एक संभावित तकनीकी कारण बताया। वहीं, तमिलनाडु में ‘थलापति’ विजय की पार्टी TVK की धमाकेदार एंट्री पर उन्होंने कहा कि युवाओं में बदलाव की तीव्र इच्छा ने एक अभिनेता को इतना बड़ा जनसमर्थन दिलाया, जो वाकई चौंकाने वाला है।

हाईकमान के पाले में गेंद

नेतृत्व परिवर्तन की इन अटकलों के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि इस संबंध में अभी कोई निश्चित तारीख तय नहीं है। खरगे के अनुसार, सोनिया गांधी, राहुल गांधी और वे स्वयं सामूहिक रूप से राज्य के भविष्य पर निर्णय लेंगे। वहीं, डीके शिवकुमार ने भी हालिया दिल्ली दौरे के बाद स्पष्ट किया है कि हाईकमान का जो भी आदेश होगा, वह उन्हें और सिद्धारमैया दोनों को शिरोधार्य होगा।

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