KNEWS DESK- कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के हालिया बयान ने इस चर्चा को और हवा दे दी है कि क्या राज्य को जल्द ही नया मुख्यमंत्री मिल सकता है। कैबिनेट फेरबदल और नेतृत्व बदलाव को लेकर उन्होंने साफ कहा कि अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान के स्तर पर ही लिया जाएगा और जब भी दिल्ली से बुलावा आएगा, वह जाने के लिए तैयार हैं।
उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने की मांग पर भी सिद्धारमैया का रुख दिलचस्प रहा। उन्होंने कहा कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है, जिससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी के भीतर इस मुद्दे पर चर्चा चल रही है। राजनीतिक जानकार इसे कांग्रेस के अंदर संतुलन साधने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।
कर्नाटक में यह स्थिति ऐसे समय में बनी है, जब अन्य राज्यों के चुनावी नतीजों का असर भी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीति पर दिखाई दे रहा है। ममता बनर्जी के लंबे कार्यकाल का जिक्र करते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि 15 साल की सत्ता के बाद एंटी-इंकंबेंसी एक बड़ा फैक्टर बन सकती है। उन्होंने मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने को भी एक अहम कारण बताया।
वहीं तमिलनाडु के राजनीतिक घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने थलपति विजय के उभार को चौंकाने वाला बताया। उनके मुताबिक युवाओं ने बदलाव की इच्छा के चलते विजय को समर्थन दिया, जिससे राजनीति में नई दिशा देखने को मिल रही है।
कुल मिलाकर, कर्नाटक में संभावित नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा, पार्टी के अंदर चल रही रणनीतिक गतिविधियों और देशभर के चुनावी संकेतों के बीच एक बड़े राजनीतिक बदलाव की ओर इशारा कर रही है। आने वाले दिनों में यह साफ हो सकेगा कि क्या डी.के. शिवकुमार को नई जिम्मेदारी मिलती है या मौजूदा नेतृत्व ही जारी रहता है।