Knews Desk-उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने शिक्षामित्रों को नई पहचान और सम्मान देने के लिए एक विशेष अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। इस अभियान की औपचारिक शुरुआत 5 मई को गोरखपुर में एक राज्यस्तरीय कार्यक्रम के माध्यम से की जाएगी। इस योजना के तहत प्रदेश के लगभग 1.43 लाख शिक्षामित्रों को जोड़ा जाएगा। सरकार का कहना है कि सभी जिलों में समानांतर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे पूरे राज्य में एक समान संदेश और प्रभाव पहुंचे।

हाल ही में शिक्षामित्रों के मानदेय में बढ़ोतरी की गई है, जिसके बाद उन्हें अब 18,000 रुपये प्रतिमाह मिल रहे हैं। इससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है और उनका मनोबल भी बढ़ा है। शिक्षामित्र लंबे समय से प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं और गांव-गांव में बच्चों को पढ़ाने में उनकी अहम भूमिका रही है।
सरकार का मानना है कि प्राथमिक विद्यालयों की मजबूत नींव में शिक्षामित्रों का बड़ा योगदान है। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्हें उचित सम्मान और बेहतर सुविधाएं देने पर जोर दिया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य न केवल शिक्षामित्रों की स्थिति में सुधार करना है, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाना है।

इस कार्यक्रम के जरिए सरकार यह संदेश देना चाहती है कि शिक्षा प्रणाली में काम करने वाले सभी कर्मचारियों का योगदान महत्वपूर्ण है। बेहतर वेतन और सम्मान मिलने से शिक्षामित्रों में नई ऊर्जा आएगी, जिससे वे और अधिक समर्पण के साथ काम कर सकेंगे। यह कदम उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।