कोटा में हैरान करने वाला मामला: 9 साल पहले मृत पिता की आत्मा लेने अस्पताल पहुंचा बेटा

Knews Desk-कोटा से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र के प्रभाव ने लोगों को चौंका दिया। मामला न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल परिसर का है, जहां 9 साल पहले मृत व्यक्ति की “आत्मा लेने” के लिए उसका बेटा परिवार और एक तांत्रिक के साथ पहुंच गया।

जानकारी के अनुसार, भीलवाड़ा जिले के छोटी बिजौलिया निवासी दिनेश प्रजापति के पिता की साल 2017 में बीमारी के कारण मृत्यु हो गई थी। इसके बाद से परिवार का दावा है कि घर में लगातार समस्याएं बढ़ने लगीं और कामकाज में रुकावट आने लगी। इसी दौरान दिनेश की मुलाकात एक महिला तांत्रिक से हुई, जिसने दावा किया कि घर का वास्तु दोष बिगड़ गया है और मृत पिता की आत्मा भटक रही है, जिसे वापस लाना जरूरी है।

तांत्रिक के सुझाव पर दिनेश अपने परिवार के साथ कोटा स्थित अस्पताल परिसर पहुंचे। वे ढोल-नगाड़ों के साथ गेट नंबर 4 के पास पहुंचे और वहां पूजा-अर्चना शुरू कर दी। उनके हाथों में मिट्टी के कलश, फूल, माला और धूप-अगरबत्ती थी। परिवार ने अस्पताल के बाहर बैठकर तंत्र क्रिया शुरू कर दी, जिससे वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी और हैरानी का माहौल बन गया।

बताया जा रहा है कि महिला तांत्रिक ने परिवार को यह विश्वास दिलाया कि यदि मृत पिता की आत्मा को विधि-विधान से “वापस” लाया जाए और घर में स्थापित किया जाए, तो सभी समस्याएं समाप्त हो जाएंगी। इसी विश्वास में परिवार ने यह कदम उठाया। अस्पताल परिसर में इस तरह की गतिविधियों को देखकर लोग आश्चर्यचकित रह गए और मौके पर भीड़ जमा हो गई। कुछ लोगों ने इस घटना को पूरी तरह अंधविश्वास करार दिया, जबकि कुछ इसे मानसिक भ्रम और सामाजिक जागरूकता की कमी से जोड़कर देख रहे हैं।

सूचना मिलने पर स्थानीय प्रशासन और पुलिस भी मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। अधिकारियों ने परिवार को समझाने की कोशिश की और उन्हें इस तरह की गतिविधियों से बचने की सलाह दी। यह घटना एक बार फिर समाज में फैले अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र पर विश्वास को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएं शिक्षा और जागरूकता की कमी का परिणाम हैं, जिन पर रोक लगाने के लिए समाज और प्रशासन दोनों को मिलकर काम करना होगा।

कोटा की यह घटना न केवल चौंकाने वाली है, बल्कि यह भी दिखाती है कि आधुनिक समय में भी कुछ लोग तर्क और विज्ञान से दूर होकर अंधविश्वास की राह पर चल रहे हैं।

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