Knews Desk-देश में एक बार फिर कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग सेक्टर पर सीधा असर पड़ने की संभावना है। तेल विपणन कंपनियों ने 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में लगभग 993 रुपये की बढ़ोतरी की है, जो करीब 1000 रुपये के बराबर है। इस बदलाव के बाद दिल्ली में एक कमर्शियल सिलेंडर की कीमत बढ़कर 3071.50 रुपये तक पहुंच गई है।

इसके साथ ही 5 किलोग्राम वाले छोटे कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में भी 261 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। हालांकि राहत की बात यह है कि घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है, जिससे आम घरों पर फिलहाल सीधा असर नहीं पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ोतरी भले ही सीधे तौर पर घरेलू उपभोक्ताओं पर लागू नहीं होती हो, लेकिन इसका असर धीरे-धीरे बाजार में दिखाई देगा। कमर्शियल गैस का उपयोग होटल, ढाबों, बेकरी, कैंटीन और शादी-विवाह जैसे बड़े आयोजनों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। ऐसे में लागत बढ़ने से इन सेवाओं की कीमतें भी बढ़ सकती हैं।

बढ़ोतरी के असर से शादी के पैकेज हो सकते हैं महंगे
शादी-ब्याह के सीजन में इस बढ़ोतरी का असर और अधिक महसूस किया जाएगा। कैटरिंग सेवाओं की लागत में वृद्धि होने से शादी के पैकेज महंगे हो सकते हैं, जिससे आम लोगों की जेब पर अप्रत्यक्ष दबाव बढ़ेगा। उदाहरण के तौर पर, पहले जहां एक बड़े आयोजन में गैस खर्च एक निश्चित बजट में रहता था, अब उसी खर्च में हजारों रुपये का अतिरिक्त बोझ जुड़ सकता है। होटल और रेस्तरां उद्योग पहले से ही खाद्य सामग्री, बिजली और परिवहन लागत में बढ़ोतरी का सामना कर रहा है। ऐसे में गैस सिलेंडर की कीमतों में यह नई बढ़ोतरी उनके मुनाफे को और प्रभावित कर सकती है। कई छोटे व्यवसायी या तो अपने दाम बढ़ाने को मजबूर होंगे या फिर अपने लाभ मार्जिन में कटौती करेंगे।
क्या है विशेषज्ञों का कहना ?
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों का असर घरेलू एलपीजी दरों पर पड़ता है। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति भी कीमत निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हालांकि सरकार की ओर से घरेलू उपभोक्ताओं को राहत बनाए रखने का प्रयास किया गया है, लेकिन कमर्शियल सेक्टर पर बढ़ते खर्च का असर अंततः उपभोक्ता महंगाई के रूप में सामने आ सकता है।
कमर्शियल गैस सिलेंडर की इस भारी बढ़ोतरी ने व्यापारिक गतिविधियों की लागत बढ़ा दी है, जिसका अप्रत्यक्ष असर आम जनता की जेब पर पड़ना तय माना जा रहा है।