KNEWS DESK- होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर वैश्विक तनाव का केंद्र बनता नजर आ रहा है। हालात ऐसे बन रहे हैं कि यहां टकराव का दूसरा दौर किसी भी समय शुरू हो सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने इस क्षेत्र को अत्यंत संवेदनशील बना दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, Donald Trump अपनी अंतरराष्ट्रीय साख को बनाए रखने और Strait of Hormuz पर प्रभाव कायम रखने के लिए आक्रामक रुख अपना सकते हैं। वहीं, Iran का दावा है कि उसके कई शहरों में हुए रहस्यमयी विस्फोटों के पीछे United States का हाथ है। ऐसे में जवाबी कार्रवाई की आशंका भी बढ़ गई है।
इसी बीच अमेरिका की ओर से संकेत मिले हैं कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य में बिछाई गई समुद्री माइन्स को हटाने के लिए बड़ा सैन्य अभियान शुरू कर सकता है। Pentagon ने इस ऑपरेशन की विस्तृत योजना तैयार कर ली है, जिसमें कई NATO देशों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
यह अभियान तीन चरणों में पूरा किया जा सकता है। पहले चरण में माइन्स के बीच सुरक्षित रास्ता तैयार किया जाएगा, ताकि माइन स्वीपर जहाज प्रभावित क्षेत्र तक पहुंच सकें। इस दौरान सैटेलाइट निगरानी का व्यापक उपयोग होगा।
दूसरे चरण में समुद्री क्षेत्र को चारों ओर से घेरकर माइन्स की पहचान की जाएगी। उन्नत तकनीक के जरिए उनके सटीक स्थान का पता लगाया जाएगा, ताकि उन्हें निष्क्रिय करने की तैयारी की जा सके।
तीसरे और अंतिम चरण में माइन्स को नष्ट करने की कार्रवाई होगी। इसके लिए सोनार तकनीक, समुद्री ड्रोन और टॉरपीडो का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे पूरे क्षेत्र को सुरक्षित बनाया जा सके।
दूसरी ओर, ईरान ने भी होर्मुज में अपनी रणनीतिक पकड़ मजबूत कर ली है। उसने माइन्स को इस तरह तैनात किया है कि तेल टैंकरों की आवाजाही उसके नियंत्रण में रहे। कुछ माइन्स ऐसी भी बताई जा रही हैं जो जीपीएस तकनीक के जरिए अपनी स्थिति बदल सकती हैं, जिससे खतरा और बढ़ जाता है।
तनाव के इस माहौल में ईरान ने अपने युद्धपोतों की तैनाती बढ़ा दी है और निगरानी के लिए सर्विलांस ड्रोन सक्रिय कर दिए हैं। इन हालातों को देखते हुए विशेषज्ञ मान रहे हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव की ओर बढ़ सकता है, जिसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर गहरा पड़ सकता है।