शिव शंकर सविता- उत्तर प्रदेश के कानपुर में ट्रैफिक पुलिसकर्मियों पर हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। कल्याणपुर की घटना के बाद अब नजीराबाद क्षेत्र में ड्यूटी पर तैनात एक ट्रैफिक सिपाही के साथ मारपीट और अभद्रता का मामला सामने आया है। बीच सड़क पर खड़ी कार हटाने की बात कहना सिपाही को इतना भारी पड़ गया कि आरोपियों ने उसे सरेआम पीट दिया और उसकी वर्दी तक फाड़ डाली। पीड़ित ट्रैफिक सिपाही राकेश कुमार मिश्रा ने मामले में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि 19 अप्रैल की रात उनकी ड्यूटी नजीराबाद स्थित बाटा शोरूम कट पर लगी थी। रात करीब 8:25 बजे एक कार बीच सड़क पर खड़ी थी, जिससे यातायात बाधित हो रहा था। जब उन्होंने चालक से गाड़ी हटाने को कहा, तो वह भड़क गया और गाली-गलौज करने लगा।
दबंग ने फोन कर अपने साथियों को बुलाया और जमकर पीटा
स्थिति तब और बिगड़ गई जब चालक ने फोन कर अपने चार से छह साथियों को मौके पर बुला लिया। आरोप है कि सभी ने मिलकर सिपाही के साथ बेरहमी से मारपीट की। इस हमले में सिपाही के चेहरे पर चोटें आईं। इतना ही नहीं, आरोपियों ने उनकी वर्दी भी फाड़ डाली, जो कानून व्यवस्था के प्रति खुलेआम चुनौती मानी जा रही है। राकेश मिश्रा ने बताया कि किसी तरह उन्होंने खुद को बचाया और तत्काल अपने वरिष्ठ अधिकारियों व कंट्रोल रूम को सूचना दी। हमलावर मौके से फरार होते समय जान से मारने की धमकी देकर भाग निकले। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तहरीर के आधार पर केस दर्ज कर लिया है। नजीराबाद थाना प्रभारी पवन कुमार सिंह के मुताबिक, कार नंबर के आधार पर आरोपी चालक की पहचान की जा रही है और उसके साथियों की भी तलाश जारी है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पूर्व में भी हो चुकी हैं इस तरह की घटनाएं
गौरतलब है कि हाल के दिनों में कानपुर में ट्रैफिक सिपाहियों पर हमले की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। कल्याणपुर क्रॉसिंग पर ऑटो चालक को सवारी बैठाने से मना करने पर सिपाही अमित के साथ मारपीट की गई थी। वहीं, विपरीत दिशा में आ रहे ऑटो को रोकने पर सिपाही संजय को भी पीटा गया और उनकी वर्दी फाड़ दी गई थी। इसके अलावा कंपनी बाग चौराहे पर प्रधानमंत्री की रिहर्सल फ्लीट के दौरान ऑटो हटाने को लेकर सिपाही आशीष गुर्जर पर हमला हुआ था। गुटैया क्रॉसिंग और न्यू शिवली रोड पर भी इसी तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जहां नियमों का पालन कराने पर पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया गया।