KNEWS DESK: उत्तर प्रदेश के बस्ती जिला से सामने आई एक अनोखी घटना इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। यह मामला सिर्फ पति-पत्नी के रिश्ते तक सीमित नहीं है, बल्कि आस्था, विश्वास और संकल्प की मिसाल भी पेश करता है। सोनहा थाना क्षेत्र के रहने वाले जोगेश नाम के युवक ने अपनी वैवाहिक जिंदगी से परेशान होकर देवी मां से एक मन्नत मांगी थी। उसने प्रार्थना की थी कि यदि उसे अपनी पत्नी से मुक्ति मिल जाती है, यानी उसका तलाक हो जाता है, तो वह अपने घर से भानपुर स्थित माता के मंदिर तक दंडवत करते हुए दर्शन करने जाएगा। समय बीतने के साथ उसकी यह मन्नत पूरी हो गई और वर्ष 2026 में उसका तलाक हो गया, जिसके बाद उसने अपने संकल्प को निभाने का फैसला किया।
एसडीएम से सड़क मार्ग पर दंडवत यात्रा की इजाजत मांगी, जिसे मंजूरी भी मिल गई
अपने इस कठिन संकल्प को पूरा करने के लिए जोगेश ने प्रशासन से भी विधिवत अनुमति ली। उसने एसडीएम से सड़क मार्ग पर दंडवत यात्रा की इजाजत मांगी, जिसे मंजूरी भी मिल गई। प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनज़र उसके साथ दो पुलिसकर्मियों की तैनाती भी की, ताकि यात्रा के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो। शनिवार की सुबह जोगेश ने बिना अन्न और जल ग्रहण किए अपनी 9 किलोमीटर लंबी दंडवत यात्रा शुरू की। यह यात्रा शारीरिक रूप से बेहद कठिन मानी जाती है, लेकिन अपने संकल्प के प्रति उसकी आस्था और दृढ़ता साफ झलक रही थी। करीब 12 घंटे की लगातार मेहनत और कठिन प्रयास के बाद उसने यह दूरी पूरी की।
यात्रा के दौरान जोगेश अकेला नहीं था
यात्रा के दौरान जोगेश अकेला नहीं था, बल्कि उसके परिवार के सदस्य और गांव के कई लोग भी उसके साथ चल रहे थे। पूरे रास्ते “जय माता दी” के जयकारों से माहौल भक्तिमय बना रहा। यह दृश्य देखने के लिए आसपास के लोग भी जुटते रहे और इस अनोखी आस्था को देखकर हैरान होते रहे। शाम करीब 6 बजे जोगेश माता मंदिर भानपुर पहुंचा, जहां उसने पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की, प्रसाद चढ़ाया और देवी मां का आशीर्वाद लिया।
इस घटना के सामने आने के बाद इलाके में पति-पत्नी के रिश्तों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू
इस घटना के सामने आने के बाद इलाके में पति-पत्नी के रिश्तों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कोई इसे आस्था और संकल्प की मिसाल मान रहा है, तो कोई इसे रिश्तों की जटिलता से जोड़कर देख रहा है। जोगेश की यह कहानी इस बात को भी उजागर करती है कि समाज में आस्था और निजी जीवन के फैसले किस तरह एक-दूसरे से जुड़ जाते हैं और कैसे लोग अपने विश्वास को निभाने के लिए कठिन से कठिन रास्ता भी चुन लेते हैं।