डिजिटल डेस्क- उत्तर प्रदेश की सियासत में आज का दिन बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि राज्य की फाइनल वोटर लिस्ट शुक्रवार को जारी की जाएगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा दोपहर में आधिकारिक तौर पर इस सूची को जारी करेंगे। इस लिस्ट में करीब 13.35 करोड़ मतदाताओं के नाम शामिल होने की संभावना है। हालांकि, इस बीच करीब 7 लाख नाम कटने की खबरों ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। फाइनल लिस्ट जारी होने से पहले ही समाजवादी पार्टी (SP) ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि आयोग भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर काम कर रहा है और जानबूझकर पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वर्ग के वोट काटने की साजिश रच रहा है, जबकि बीजेपी समर्थकों के फर्जी वोट जोड़े जा रहे हैं। सपा ने अपने कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे सतर्क रहें और किसी भी गड़बड़ी के सबूत जुटाकर पार्टी कार्यालय में जमा करें, ताकि इस मुद्दे को जनता और अदालत के सामने उठाया जा सके।
अंतिम सूची में 13.35 करोड़ नाम जारी होने के संकेत
दरअसल, कई महीनों तक चली SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया के बाद यह फाइनल वोटर लिस्ट तैयार की गई है। 6 जनवरी को जारी ड्राफ्ट लिस्ट में कुल 12.55 करोड़ मतदाता थे, जिनमें 6.88 करोड़ पुरुष और 5.67 करोड़ महिलाएं शामिल थीं। इसके बाद फॉर्म-6 के जरिए नए नाम जोड़ने और फॉर्म-7 के जरिए नाम हटाने की प्रक्रिया चली। आंकड़ों के अनुसार, करीब 86.69 लाख लोगों ने नए नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया, जबकि 3.18 लाख लोगों ने खुद ही अपना नाम हटाने का अनुरोध किया। सूत्रों के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया के बाद लगभग 80 लाख नए मतदाता सूची में जुड़े हैं, जबकि करीब 7 लाख नाम हटाए गए हैं। इस तरह अंतिम संख्या 13.35 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है।
पारिवारिक रिकॉर्ड से मेल न खाने वाले नाम सबसे ज्यादा
चुनाव आयोग के अधिकारियों का कहना है कि जिन मतदाताओं के नाम काटे गए हैं, उनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जिनकी पहचान संबंधित पारिवारिक रिकॉर्ड से मेल नहीं खा सकी। इस संबंध में करीब 1.04 करोड़ लोगों को नोटिस भेजे गए थे। इसके अलावा 2.22 करोड़ मामलों में तार्किक विसंगतियां पाई गईं, जिनकी जांच के बाद निर्णय लिया गया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश को लेकर विशेष चर्चा है, जहां सबसे ज्यादा नाम कटने की आशंका जताई जा रही है। वहीं, इस बार भी पुरुष मतदाताओं की संख्या महिलाओं से अधिक रहने की उम्मीद है, हालांकि नए आवेदन में महिला और पुरुष दोनों की भागीदारी लगभग बराबर रही है। फाइनल वोटर लिस्ट को जिला निर्वाचन कार्यालयों, तहसील स्तर पर और चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराया जाएगा। आयोग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता और नियमों के तहत की गई है।