KNEWS DESK- अमेरिका और ईरान के बीच हुए संघर्षविराम को 24 घंटे से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन जमीनी हालात इस समझौते के विपरीत नजर आ रहे हैं। उम्मीद थी कि इस सीजफायर के बाद मिडिल ईस्ट में शांति बहाल होगी, हमले रुकेंगे और तेल-गैस सप्लाई सामान्य हो जाएगी, लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा।
अमेरिका और ईरान के बीच हुए इस समझौते के बावजूद इजराइल ने लेबनान में हमले तेज कर दिए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन हमलों में 200 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
ईरान का आरोप है कि अमेरिका और इजराइल दोनों ही संघर्षविराम की शर्तों का उल्लंघन कर रहे हैं। तेहरान का कहना है कि उसने जो 10 सूत्रीय शांति प्रस्ताव दिया था, उसमें लेबनान को भी शामिल किया गया था। लेकिन अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि यह समझौता केवल अमेरिका और ईरान के बीच सीमित था।
डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा कि लेबनान इस सीजफायर डील का हिस्सा नहीं है। वहीं, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी इसे “गलतफहमी” बताया।
इस बयानबाजी के बीच ईरान ने कड़ा रुख अपनाया है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर गालिबफ ने कहा कि अगर लेबनान पर हमले जारी रहे, तो ईरान एकतरफा रूप से सीजफायर खत्म कर सकता है। उन्होंने इजराइल के हमलों को समझौते का सीधा उल्लंघन बताया है।
दूसरी ओर, सीरिया ने भी इजराइल के हमलों की कड़ी निंदा की है और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है।
सबसे अहम मुद्दा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का है, जहां से दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल सप्लाई होती है। सीजफायर के बाद इसके खुलने की उम्मीद थी, लेकिन अब तक केवल कुछ ही जहाज यहां से गुजर पाए हैं। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि हालात नहीं सुधरे तो इस अहम जलमार्ग को बंद रखा जा सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि कागजों पर हुआ सीजफायर अभी जमीन पर असर नहीं दिखा पा रहा। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या दोनों पक्ष बातचीत से समाधान निकालते हैं या मिडिल ईस्ट एक बार फिर बड़े संघर्ष की ओर बढ़ता है।