रात में खाली कराया जाता था अस्पताल, बाहर से बुलाकर होते थे ट्रांसप्लांट… कानपुर किडनी कांड में धीरे-धीरे खुल रहे राज

डिजिटल डेस्क- उत्तर प्रदेश के कानपुर में सामने आए चर्चित किडनी कांड की जांच में अब चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। यह मामला भले ही पुराना हो, लेकिन जांच आगे बढ़ने के साथ-साथ इस अवैध नेटवर्क की परतें लगातार खुल रही हैं। कमिश्नरेट पुलिस की जांच में सामने आया है कि आहूजा अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए एक सुनियोजित और गुप्त सिस्टम अपनाया जाता था। पुलिस के हत्थे चढ़े एक आरोपी ने पूछताछ में बताया कि अस्पताल में ट्रांसप्लांट के लिए पहले से पूरी प्लानिंग की जाती थी। रोजाना काम करने वाले स्टाफ को देर रात ड्यूटी के नाम पर घर भेज दिया जाता था, ताकि किसी को शक न हो। इसके बाद मेरठ से डा. अफजाल और दिल्ली से डा. रोहित अपनी टीम के साथ कानपुर पहुंचते थे।

ऑपरेशन खत्म होते ही शहर छोड़कर बाहर चले जाते थे आरोपी

आरोप है कि ये डॉक्टर रात के समय गुप्त तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट करते थे और ऑपरेशन खत्म होते ही शहर छोड़कर चले जाते थे। पुलिस के मुताबिक, यह नेटवर्क सिर्फ कानपुर तक सीमित नहीं था, बल्कि कई अन्य जिलों में भी फैला हुआ हो सकता है। इस पूरे रैकेट के तार जोड़ने के लिए अब अन्य जिलों में भी जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है। इस मामले में एसएम कासिम आबिदी (डीसीपी पश्चिम) ने बताया कि पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है और जल्द ही चार अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि इस अवैध नेटवर्क से जुड़े हर व्यक्ति को कानून के दायरे में लाया जाएगा। वहीं, इस कांड से जुड़े मरीजों की स्थिति को लेकर भी चिंताजनक जानकारी सामने आई है।

लखनऊ के राम मनोहर लोहिया में कराया गया भर्ती

किडनी डोनर आयुष की हालत में कुछ सुधार जरूर हुआ है, लेकिन वह अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं है और कुछ बोलने की स्थिति में नहीं है। दूसरी ओर, किडनी रिसीवर पारुल की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डा. संजय काला ने बताया कि पारुल को गंभीर संक्रमण हो गया है और उसकी स्थिति नाजुक बनी हुई है। गुरूवार को परिजनों ने लखनऊ के राम मनोहर लोहिया में भर्ती कराया हैं जहां उनकी हालत में सुधार देखने को मिल रहा है।

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