डिजिटल डेस्क- उत्तर प्रदेश के कानपुर में सामने आए चर्चित किडनी कांड मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। किडनी ट्रांसप्लांट से जुड़े दो मरीजों डोनर और रेसिपिएंट को बेहतर इलाज और उन्नत चिकित्सा सुविधाओं के लिए दिल्ली स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल (RML) रेफर कर दिया गया है। अस्पताल प्रशासन ने मरीजों की स्थिति को देखते हुए यह निर्णय लिया। जानकारी के मुताबिक, ट्रांसप्लांट के बाद रेसिपिएंट की हालत काफी गंभीर हो गई थी। अस्पताल में भर्ती के समय मरीज में किडनी फेलियर और सेप्टीसीमिया जैसे खतरनाक लक्षण पाए गए थे, जिससे स्थिति चिंताजनक बन गई थी। हालांकि, चिकित्सकों की निगरानी में लगातार दो दिनों तक चले इलाज के बाद मरीज की हालत में कुछ सुधार दर्ज किया गया है। विशेष रूप से हीमोग्लोबिन और क्रिएटिनिन स्तर में सुधार देखा गया, जो उपचार के सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं।
जटिलताओं से निपटने के लिए किया गया रेफर
डॉक्टरों के अनुसार, किडनी ट्रांसप्लांट के बाद कई जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं, जिनके लिए उन्नत संसाधन और विशेषज्ञ चिकित्सा टीम की आवश्यकता होती है। स्थानीय स्तर पर इन जटिलताओं से निपटने के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने के कारण अस्पताल प्रशासन ने मरीजों को उच्च चिकित्सा संस्थान में स्थानांतरित करने का फैसला लिया। इस संबंध में अस्पताल के प्रिंसिपल और डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के डायरेक्टर के बीच विस्तृत बातचीत हुई। साथ ही, नेफ्रोलॉजी यूनिट की सहमति मिलने के बाद मरीजों को रेफर करने की प्रक्रिया पूरी की गई। आज सुबह करीब 10:15 बजे दोनों मरीजों को पूरी सुरक्षा और चिकित्सकीय निगरानी में दिल्ली के लिए रवाना किया गया।
गंभीरों की स्थिति संतोषजनक, फिलहाल खतरे से बाहर
वहीं, डोनर की स्थिति को लेकर राहत भरी खबर सामने आई है। डॉक्टरों के अनुसार, डोनर शुरुआत से ही स्थिर था और फिलहाल पूरी तरह खतरे से बाहर है। उसकी स्थिति संतोषजनक बनी हुई है और उसे विशेष निगरानी में रखा गया है। इस पूरे मामले ने एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था और अवैध ट्रांसप्लांट से जुड़े सवालों को खड़ा कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में पारदर्शिता और सख्त निगरानी बेहद जरूरी है, ताकि मरीजों की जान से खिलवाड़ न हो।