डिजिटल डेस्क- उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में अमर शहीदों की प्रतिमाएं हटाए जाने का मामला अब बड़ा विवाद बन गया है। नगर निगम परिसर में शहीद ठाकुर रोशन सिंह, राम प्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्ला खान की प्रतिमाओं को हटाने के बाद शहर में आक्रोश की लहर दौड़ गई है। इस घटना ने न केवल स्थानीय लोगों की भावनाओं को आहत किया है, बल्कि प्रशासनिक कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर निगम द्वारा बुलडोजर की मदद से प्रतिमाओं को हटाया गया। इतना ही नहीं, उन्हें सम्मानजनक तरीके से सुरक्षित रखने के बजाय अन्य स्थान पर डाल दिया गया, जिससे लोगों की भावनाएं गहराई से आहत हुई हैं। घटना के सामने आते ही शहर के विभिन्न सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने विरोध जताना शुरू कर दिया। शाहजहांपुर, जिसे “शहीदों की नगरी” कहा जाता है, वहां इस तरह की कार्रवाई को लेकर लोगों में खासा गुस्सा देखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने लिया संज्ञान
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुरंत संज्ञान लिया है। उनके निर्देश के बाद प्रशासन हरकत में आया और कार्रवाई शुरू की गई। जानकारी के अनुसार, जिस निजी फर्म के जरिए यह काम कराया जा रहा था, उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी गई है। इसके साथ ही इस परियोजना से जुड़े जूनियर इंजीनियर (JE) और सहायक अभियंता (AE) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
जांच के आदेश, दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई
जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की विस्तृत जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। डीएम ने यह भी आश्वासन दिया कि शहीदों की प्रतिमाओं को उनके मूल स्थान पर “जैसे की तैसे” पुनः स्थापित कराया जाएगा। इसके लिए प्रशासन ने प्रक्रिया शुरू कर दी है।
लोगों की मांग- सम्मान के साथ हो पुनर्स्थापना
शहरवासियों का कहना है कि यह सिर्फ मूर्तियां नहीं, बल्कि देश के उन वीर सपूतों की स्मृति हैं जिन्होंने आजादी के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। ऐसे में उनके साथ किसी भी तरह की असम्मानजनक कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जा सकती। लोगों की मांग है कि न केवल प्रतिमाओं को तुरंत सम्मानपूर्वक पुनर्स्थापित किया जाए, बल्कि इस घटना के लिए जिम्मेदार सभी अधिकारियों और संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।