लोकसभा में पीएम मोदी का बड़ा बयान, वेस्ट एशिया संकट पर भारत सतर्क, तेल-गैस सप्लाई बनाए रखने पर जोर

डिजिटल डेस्क- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर विस्तृत बयान दिया और देश को भरोसा दिलाया कि भारत सरकार हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। पिछले 24 दिनों से जारी इस जंग के बीच प्रधानमंत्री का यह संबोधन बेहद अहम माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने भारत की ऊर्जा सुरक्षा, विदेश नीति और नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में मौजूदा हालात बेहद चिंताजनक हैं और इसका असर वैश्विक स्तर पर देखने को मिल रहा है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और विभिन्न देशों के साथ संपर्क में है, ताकि तेल और गैस की आपूर्ति बाधित न हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का प्रयास है कि जहां से संभव हो, वहां से ऊर्जा संसाधनों की आपूर्ति जारी रखी जाए।

विदेश मंत्री ने दी जानकारी

इस संदर्भ में उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर द्वारा पहले दी गई जानकारी का भी जिक्र किया और कहा कि पिछले तीन सप्ताह से अधिक समय से यह संकट बना हुआ है, जिसका आम लोगों के जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पूरी दुनिया इस संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रयासरत है। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में करीब एक करोड़ भारतीय काम करते हैं और बड़ी संख्या में भारतीय समुद्री जहाजों पर क्रू मेंबर के रूप में भी कार्यरत हैं। ऐसे में भारत के लिए यह स्थिति और भी संवेदनशील हो जाती है। उन्होंने कहा कि यह जरूरी है कि भारत की संसद से एकजुट और स्पष्ट संदेश दुनिया तक पहुंचे।

कमर्शियल जहाजों पर हो रहे हमले अस्वीकार्य- पीएम मोदी

मोदी ने कमर्शियल जहाजों पर हो रहे हमलों को अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि भारत ने हमेशा शांति और संवाद का समर्थन किया है। उन्होंने बताया कि उन्होंने स्वयं पश्चिम एशिया के कई प्रमुख नेताओं से बातचीत कर तनाव कम करने की अपील की है और सभी पक्षों को शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया है। ऊर्जा संकट को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि पहले भारत 27 देशों से तेल आयात करता था, जिसे अब बढ़ाकर 41 देशों तक कर दिया गया है। इसके अलावा एक विशेष समूह का गठन किया गया है, जो रोजाना बैठक कर आयात-निर्यात से जुड़ी समस्याओं की समीक्षा करता है और समाधान निकालता है।

होर्मुज क्षेत्र का किया जिक्र

प्रधानमंत्री ने होर्मुज क्षेत्र का भी जिक्र किया, जहां से भारत में बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, गैस और उर्वरक आते हैं। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, लेकिन इसके बावजूद सरकार हर संभव प्रयास कर रही है कि देश में ऊर्जा संकट उत्पन्न न हो। संकट के बीच भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि अब तक 3 लाख 75 हजार भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है। इसके लिए 24×7 हेल्पलाइन और विशेष मिशन के माध्यम से लगातार सहायता दी जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ भारतीयों की इस संघर्ष में मृत्यु हुई है और कई घायल हुए हैं, जिनका इलाज जारी है और उनके परिवारों से संपर्क बनाए रखा गया है।

अफवाहों से बचने और सतर्कता बरतने की अपील

प्रधानमंत्री ने देश के भीतर भी सतर्कता बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस तरह के संकट के समय अफवाहों से बचना जरूरी है और जमाखोरी व कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने राज्यों को भी इस दिशा में सख्ती बरतने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले प्रधानमंत्री ने रविवार को एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की थी, जिसमें पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, बिजली और उर्वरक जैसे क्षेत्रों की तैयारियों की समीक्षा की गई। बैठक में आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाए रखने और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

बीती 28 फरवरी से तनावपूर्ण है स्थिति

गौरतलब है कि 28 फरवरी से अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है, जिसे लेकर विपक्ष लगातार सरकार से चर्चा की मांग कर रहा था। अब प्रधानमंत्री के इस विस्तृत बयान को विपक्ष के सवालों का जवाब भी माना जा रहा है। वहीं, संसद के आज के कार्यसूची में निर्मला सीतारमण द्वारा कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया जाना भी शामिल है, जिसके तहत कंपनी कानून में महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित हैं।

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