KNEWS DESK- ईद-उल-फितर इस्लाम धर्म का एक बेहद पवित्र और खास त्योहार है, जिसे आमतौर पर ईद या मीठी ईद भी कहा जाता है। भारत में आज यह त्योहार बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। शुक्रवार को चांद दिखाई देने के बाद आज देशभर में ईद का जश्न मनाया जा रहा है।
यह त्योहार रमजान के पूरे महीने रोजे रखने के बाद मनाया जाता है। जैसे ही शव्वाल महीने का नया चांद नजर आता है, ईद-उल-फितर का त्योहार मनाया जाता है।
ईद-उल-फितर का अर्थ और महत्व
‘ईद’ का मतलब होता है खुशियां, जबकि ‘उल-फितर’ का अर्थ है रोजा खोलना। इस दिन लोग अल्लाह का शुक्र अदा करते हैं कि उन्होंने उन्हें पूरे रमजान में रोजे रखने की ताकत दी।
कहा जाता है कि पूरे महीने के संयम, सब्र और इबादत के बाद जो खुशी मिलती है, उसी खुशी को ईद के रूप में मनाया जाता है। इस्लामी (हिजरी) कैलेंडर के अनुसार, रमजान के अंत में यह त्योहार आता है।
ईद-उल-फितर की शुरुआत कब हुई?
ईद-उल-फितर की शुरुआत पैगंबर हजरत मुहम्मद द्वारा की गई थी। इतिहास के अनुसार, इसकी शुरुआत 624 ईस्वी में मदीना में हुई थी। यह हिजरत के बाद दूसरा साल था, जब मुसलमानों ने पहला रमजान पूरा किया था। जब पैगंबर हजरत मुहम्मद मदीना पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि लोग दो खास दिनों पर जश्न मनाते हैं। तब उन्होंने बताया कि अल्लाह ने मुसलमानों को दो विशेष त्योहार दिए हैं ईद-उल-फितर, ईद-उल-अजहा इसी के बाद से ईद-उल-फितर मनाने की परंपरा शुरू हुई।
ईद के दिन क्या किया जाता है?
ईद का दिन इबादत, खुशियों और आपसी भाईचारे का प्रतीक होता है। इस दिन लोग सुबह उठकर नहाकर साफ-सुथरे और नए कपड़े पहनते हैं। मस्जिद या ईदगाह में जाकर ईद की नमाज अदा करते हैं। नमाज के बाद एक-दूसरे को गले लगाकर “ईद मुबारक” कहते हैं। अल्लाह से दुआ और इबादत करते हैं। जरूरतमंदों को दान (फितरा/जकात) देते हैं।
ईद-उल-फितर को “मीठी ईद” भी कहा जाता है, क्योंकि इस दिन घरों में खासतौर पर सेवइयां और कई तरह के स्वादिष्ट पकवान बनाए जाते हैं। लोग अपने परिवार, दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ मिलकर इन व्यंजनों का आनंद लेते हैं।
ईद-उल-फितर सिर्फ एक धार्मिक त्योहार नहीं, बल्कि यह प्यार, भाईचारे, दया और इंसानियत का संदेश भी देता है। यह हमें सिखाता है कि खुशियां तभी पूरी होती हैं, जब हम उन्हें दूसरों के साथ बांटते हैं। ईद मुबारक!