डिजिटल डेस्क- मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका अब बड़ा और अभूतपूर्व कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ईरान पर दबाव बनाने के लिए उसके महत्वपूर्ण ‘खर्ग आइलैंड’ (Kharg Island) पर कब्जा करने या वहां समुद्री नाकाबंदी करने की योजना पर गंभीरता से विचार कर रही है। इस आक्रामक रणनीति के तहत करीब 2500 मरीन सैनिकों की एक टुकड़ी को जल्द ही इस इलाके में भेजा जाने वाला है। सूत्रों के अनुसार, खर्ग आइलैंड ईरान के तट से महज 15 मील दूर स्थित है और यह ईरानी अर्थव्यवस्था के लिए जीवन रेखा है। ईरान का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल इसी आइलैंड से दुनिया को भेजा जाता है। अमेरिका का मानना है कि अगर इस आइलैंड को अपने नियंत्रण में ले लिया जाए या यहां भारी सैन्य दबाव बनाया जाए, तो ईरान को होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को खोलने के लिए मजबूर किया जा सकता है। बता दें कि फिलहाल ईरान ने इस स्ट्रेट से गुजरने वाले कई तेल टैंकरों को रोक रखा है, जिसकी वजह से दुनिया में पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं।
अगले एक महीने तक हवाई हमले रह सकते हैं जारी
अमेरिकी मीडिया ‘एक्सियोस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका इस आइलैंड पर तुरंत कब्जा नहीं करेगा। इसके पहले वह ईरान की सैन्य ताकत को कमजोर करने का प्रयास करेगा। इसके लिए अगले लगभग एक महीने तक हवाई हमले जारी रखे जा सकते हैं। हाल ही में अमेरिका द्वारा खर्ग आइलैंड पर किए गए कई बड़े एयरस्ट्राइक को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। 2500 सैनिकों के अलावा, दो और मरीन यूनिट्स भी इस क्षेत्र की ओर रवाना हो रही हैं। व्हाइट हाउस और पेंटागन और अधिक सैनिकों को भेजने पर भी विचार कर रहे हैं, हालांकि अभी इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप हर विकल्प को खुला रखना चाहते हैं। जरूरत पड़ने पर जमीनी हमला (Ground Invasion) भी एक विकल्प है।
गुरिल्ला युद्ध छिड़ने के हैं संकेत
हालांकि, कई विशेषज्ञ इसे काफी खतरनाक मानते हैं। उनका कहना है कि खर्ग आइलैंड पर कब्जा करने के बाद भी यह जरूरी नहीं कि ईरान झुक जाए, क्योंकि वह दूसरी जगहों से तेल सप्लाई रोक सकता है या गुरिल्ला युद्ध छेड़ सकता है। एक अन्य विकल्प यह भी सामने आ रहा है कि अमेरिका बिना जमीन पर कब्जा किए ही अपनी नौसेना और विमानों की मदद से टैंकरों को सुरक्षा देकर रास्ता खुलवाने की कोशिश करे। इस पूरे संकट के चलते राष्ट्रपति ट्रंप को अपनी चीन यात्रा भी स्थगित करनी पड़ी है। अमेरिका साफ तौर पर इस मुद्दे पर पीछे हटने के मूड में नहीं है और ईरान को दबाने के लिए हर संभव तरीके पर विचार कर रहा है, जिससे वैश्विक शांति और अर्थव्यवस्था को भारी खतरा मंडरा रहा है।