KNEWS DESK- हिंदू धर्म में खरमास की अवधि को बेहद विशेष और महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे लगभग एक महीने की ऐसी अवधि माना जाता है जिसमें कई शुभ और मांगलिक कार्यों को करने से बचा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय विवाह, सगाई, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य रोक दिए जाते हैं।
खरमास तब लगता है जब ग्रहों के राजा सूर्य देव गुरु की राशियों में प्रवेश करते हैं। जब सूर्य धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तब खरमास की शुरुआत होती है। माना जाता है कि इस दौरान सूर्य के शुभ प्रभाव कम हो जाते हैं और गुरु की शुभता भी प्रभावित होती है।
कब से शुरू हो रहा है खरमास?
ज्योतिष गणना के अनुसार सूर्य देव 14 मार्च की रात 01 बजकर 08 मिनट पर मीन राशि में प्रवेश करेंगे। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार रात 12 बजे के बाद अगला दिन शुरू हो जाता है, इसलिए इसे 15 मार्च से शुरू माना जा रहा है। इस तरह साल 2026 में खरमास की शुरुआत 15 मार्च से होगी और इसका समापन 14 अप्रैल को होगा। इसी दिन सूर्य देव मेष राशि में प्रवेश करेंगे और इसके साथ ही खरमास समाप्त हो जाएगा।
क्यों नहीं किए जाते शुभ कार्य?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार किसी भी शुभ और मांगलिक कार्य के लिए सूर्य और गुरु ग्रह का शुभ स्थिति में होना बहुत जरूरी माना जाता है। जब सूर्य गुरु की राशि में प्रवेश करते हैं तो उनके प्रभाव में कमी आ जाती है, जिससे शुभ कार्यों का पूर्ण फल नहीं मिल पाता। यही कारण है कि इस अवधि में विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों को टाल दिया जाता है।
खरमास के दौरान इन कामों से बचें
खरमास के समय कुछ विशेष कार्यों को करने से मना किया जाता है। इस दौरान इन कामों से बचना चाहिए:
- शादी-विवाह या सगाई जैसे मांगलिक कार्य
- गृह प्रवेश करना
- नया वाहन या संपत्ति खरीदना
- नामकरण या मुंडन संस्कार
- नया व्यापार या बड़ा काम शुरू करना
माना जाता है कि इन कार्यों को इस समय करने से शुभ फल नहीं मिलता।
खरमास में क्या करना होता है शुभ?
जहां एक ओर मांगलिक कार्यों को टाल दिया जाता है, वहीं इस अवधि में धार्मिक और आध्यात्मिक कार्य करना बहुत शुभ माना जाता है।
खरमास के दौरान इन कार्यों को करना लाभदायक माना गया है:
- नियमित पूजा-पाठ और भगवान की भक्ति
- सूर्य देव की आराधना
- पवित्र नदियों में स्नान
- जरूरतमंदों को दान करना
- पितरों का तर्पण और श्राद्ध कर्म
माना जाता है कि इन कार्यों को करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है।
आध्यात्मिक साधना का समय माना जाता है खरमास
खरमास को केवल अशुभ समय नहीं बल्कि आध्यात्मिक साधना का भी उत्तम समय माना गया है। इस दौरान लोग भक्ति, दान और ध्यान के माध्यम से अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करते हैं। इसी कारण धर्मग्रंथों में खरमास को आत्मचिंतन और भगवान की आराधना के लिए विशेष समय बताया गया है।