KNEWS DESK – महाराष्ट्र सरकार ने लंबे समय से चर्चा में रहे धर्मांतरण विरोधी कानून को लेकर बड़ा कदम उठाया है। राज्य कैबिनेट ने एंटी कन्वर्जन (धर्मांतरण विरोधी) विधेयक को मंजूरी दे दी है। सरकार के इस फैसले के बाद अब जल्द ही इस कानून से जुड़ा शासन निर्णय (जीआर) जारी किए जाने की तैयारी की जा रही है।
जबरन धर्मांतरण पर सख्त कार्रवाई
राज्य सरकार के मंत्री नितेश राणे ने बताया कि महाराष्ट्र में लंबे समय से धर्मांतरण विरोधी कानून की मांग उठती रही है। कई हिंदुत्व संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मुद्दे पर वर्षों तक आंदोलन और मोर्चे निकाले थे।
उन्होंने कहा कि इन्हीं मांगों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह अहम फैसला लिया है। नए कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति जबरन, धोखे से या किसी तरह का लालच देकर धर्म परिवर्तन कराता है तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
नॉन-बेलेबल अपराध होगा
मंत्री ने बताया कि इस तरह के मामलों को नॉन-बेलेबल अपराध की श्रेणी में रखा जाएगा। यानी आरोपी की गिरफ्तारी हो सकेगी और उसे आसानी से जमानत नहीं मिल पाएगी।
सरकार जल्द ही इस कानून के सभी तकनीकी और कानूनी प्रावधानों की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करेगी, ताकि आम नागरिकों को इसके नियमों और दायरे के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल सके।
अन्य राज्यों से सख्त होगा कानून
नितेश राणे का दावा है कि महाराष्ट्र में प्रस्तावित धर्मांतरण विरोधी कानून अन्य राज्यों की तुलना में ज्यादा सख्त और प्रभावी होगा। उन्होंने मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां लागू कानूनों से भी अधिक कठोर प्रावधान महाराष्ट्र के विधेयक में शामिल किए गए हैं।
किसानों को भी मिल सकती है बड़ी राहत
इस बीच राज्य सरकार किसानों को भी बड़ी राहत देने की तैयारी में है। कर्ज में डूबे किसानों के लिए जल्द ही कर्ज माफी की घोषणा की जा सकती है।
राज्य के कृषि मंत्री दत्तात्रेय भारणे ने बताया कि सरकार 30 जून से पहले किसानों की कर्ज माफी को लेकर बड़ा और ऐतिहासिक फैसला ले सकती है। इस मुद्दे पर निर्णय लेने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है।
अप्रैल में आएगी समिति की रिपोर्ट
सरकार के अनुसार, समिति अपनी रिपोर्ट अप्रैल के पहले सप्ताह तक सौंप देगी। इसके बाद 30 जून से पहले कर्ज माफी को लेकर अंतिम घोषणा की जाएगी।