दिल्ली आबकारी नीति केस: क्या है पूरा विवाद और केजरीवाल-सिसोदिया ने कितने दिन काटे जेल में?

KNEWS DESK – दिल्ली की सियासत में जिस मुद्दे ने सबसे लंबी और तीखी बहस को जन्म दिया, वह रहा आबकारी नीति से जुड़ा कथित भ्रष्टाचार मामला। करीब चार साल तक चली जांच, गिरफ्तारियां, अदालतों में बहस और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बाद अब इस केस में एक अहम पड़ाव आ चुका है। 27 फरवरी 2026 को अदालत ने सीबीआई मामले में पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal, पूर्व उपमुख्यमंत्री Manish Sisodia और अन्य 21 आरोपियों को बरी कर दिया। इस फैसले ने राजधानी की राजनीति में एक नया अध्याय खोल दिया है।

क्या था पूरा मामला?

17 नवंबर 2021 को दिल्ली सरकार ने नई आबकारी (शराब) नीति लागू की थी। सरकार का दावा था कि इससे शराब की बिक्री व्यवस्था पारदर्शी होगी, अवैध कारोबार पर रोक लगेगी और राजस्व में बड़ा इजाफा होगा। नई नीति के तहत दिल्ली को 32 जोनों में बांटा गया और कुल 849 निजी दुकानों को लाइसेंस देने की योजना बनाई गई।

सबसे बड़ा बदलाव यह था कि शराब की सभी दुकानें निजी हाथों में सौंप दी गईं। पहले लगभग 60 प्रतिशत दुकानें सरकारी और 40 प्रतिशत निजी थीं, लेकिन नई नीति में 100 प्रतिशत निजीकरण कर दिया गया।

लाइसेंस फीस और मुनाफे पर विवाद

नई नीति में लाइसेंस फीस कई गुना बढ़ा दी गई। उदाहरण के तौर पर एल-1 लाइसेंस की फीस 25 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये कर दी गई। सरकार का कहना था कि इससे उसे एकमुश्त बड़ी आय होगी।

हालांकि विपक्ष ने आरोप लगाया कि फीस में भारी बढ़ोतरी से छोटे कारोबारियों के लिए बाजार में बने रहना मुश्किल हो गया और बड़े कारोबारियों को फायदा पहुंचाया गया। शराब की कीमत और मुनाफे के बंटवारे को लेकर भी सवाल उठे। आरोप था कि नई व्यवस्था में खुदरा विक्रेताओं का लाभ काफी बढ़ गया, जबकि सरकार का हिस्सा घट गया।

जांच एजेंसियों की एंट्री

नीति को लेकर विवाद बढ़ने पर दिल्ली के उपराज्यपाल ने जांच की सिफारिश की। 19 अगस्त 2022 को Central Bureau of Investigation (सीबीआई) ने एफआईआर दर्ज की। आरोप था कि नीति बनाते समय नियमों का उल्लंघन किया गया और कुछ कारोबारियों को लाभ पहुंचाया गया।

इसके बाद Enforcement Directorate (ईडी) ने भी मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच शुरू की। कई नेताओं और कारोबारियों से पूछताछ हुई, छापेमारी की गई और गिरफ्तारियां भी हुईं।

मार्च 2023 में मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार किया गया। अक्टूबर 2023 में आप सांसद संजय सिंह को ईडी ने हिरासत में लिया। मार्च 2024 में अरविंद केजरीवाल को भी गिरफ्तार किया गया। बाद में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिली और फिर नियमित जमानत भी दी गई।

अदालत का फैसला

लंबी सुनवाई के बाद 27 फरवरी 2026 को अदालत ने सीबीआई केस में केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत का कहना था कि पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर आरोप सिद्ध नहीं होते।

इस फैसले के बाद आम आदमी पार्टी ने इसे “सच्चाई की जीत” बताया और कहा कि यह मामला राजनीतिक द्वेष से प्रेरित था। वहीं विपक्ष का कहना है कि ईडी से जुड़े मामलों की प्रक्रिया अभी भी अलग से जारी है और कानूनी लड़ाई पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

कब क्या हुआ

27 फरवरी 2026 – अदालत ने केजरीवाल, सिसोदिया समेत 21 आरोपियों को बरी किया

17 नवंबर 2021 – नई आबकारी नीति लागू

8 जुलाई 2022 – मुख्य सचिव की रिपोर्ट में अनियमितताओं का जिक्र

22 जुलाई 2022 – उपराज्यपाल ने सीबीआई जांच की सिफारिश

19 अगस्त 2022 – सीबीआई की छापेमारी

22 अगस्त 2022 – ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग केस दर्ज किया

मार्च 2023 – मनीष सिसोदिया गिरफ्तार

अक्टूबर 2023 – संजय सिंह गिरफ्तार

मार्च 2024 – अरविंद केजरीवाल गिरफ्तार, बाद में जमानत

3 सितंबर 2024 – सुप्रीम कोर्ट से सीबीआई केस में जमानत

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