उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड में आगामी वर्ष 2027 में विधानसभा के चुनाव होने है, जिसके चलते प्रदेश के सत्ता पक्ष सहित तमाम राजनैतिक दल अपनी कमर अभी से कस्ते हुए नज़र आ रहे है. जहाँ एक ओर सत्ता पक्ष भाजपा अपनी तमाम योजनाओं और अभियानों से प्रदेश की जनता को अपनी ओर आकर्षित करने में लगी है. वही प्रदेश के विपक्षी दल लगातार सरकार की नाकामियों को उजागर कर जनता को अपनी ओर लुभाने का प्रयास कर रहे है.अब तक सभी विपक्षी दल जो अलग अलग होकर सरकार के खिलाफ हल्ला बोलते हुए नज़र आ रहे थें, अब इंडिया गठबंधन के जरिये सरकार को घेरने के लिए प्रयास करते दिखाई पड़ रहे है. आपको बता दे हालही में एक बैठक में निर्णय लेने के बाद इंडिया गठबंधन के नेताओं ने सरकार के खिलाफ कई मुद्दों को उठा आज धरना व मौन व्रत के जरिये प्रदर्शन किया है. विपक्ष का मानना है कि सरकार व सत्ता पक्ष के नेता जहाँ अपने अपने दावे पेश कर रहे है, वही अभी भी कुछ मुद्दे ऐसे है जिनको पूरा करने में सरकार पीछे रह गयी है, जिनमे मलिन बस्तियों को मालिकाना हक देने व राज्य के भूमिहीनों और आपदाग्रस्त गांवो के पुनर्वास जैसे मुद्दे भी शामिल है. साथ ही इंडिया गठबंधन के नेताओं ने आरोप भी लगाया है कि सरकार ऐसी तमाम जमीनों को पूंजीपतियों को लीज़ में देने और बस्तियों को उजाड़ने का काम कर रही है. बरहाल यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि प्रदेश की जनता किस पार्टी को आगामी विधानसभा चुनावों में जीत का ताज़ पहनाती नज़र आएगी लेकिन एक तरफ चल रहे भाजपा सरकार के दावे और दूसरी ओर विपक्ष के सवालों से यह जरूर जाहिर होता है. की चुनावों को नजदीक आते देख सभी दलों की जद्दोजहद भी शुरू हो गयी और जिसके चलते आरोप प्रत्यारोपों का सिलसिला अभी से शुरु हो गया है.
इंडिया गठबंधन के घटक दलों ने आज 25 फरवरी को देहरादून के गांधी पार्क में सरकार की नीतियों के खिलाफ धरना दिया है. कांग्रेस सहित इंडिया गठबंधन के नेताओं ने आरोप लगाए गए कि सरकार नियमों को दरकिनार कर ऋषिकेश, बिंदुखत्ता, पूछड़ी समेत कई इलाकों को खाली कराने का काम कर रही है. ऐसे में उनकी मांग है कि साल 2016 की कट ऑफ डेट को मानकर बस्ती और वन भूमि वालों को मालिकाना हक दिया जाए. ऐसे में आम लोगों के अस्तित्व के साथ जुड़े इन बिंदुओं को लेकर इंडिया गठबंधन, तमाम सामाजिक जन सरोकारों से जुड़े संगठनों ने गांधी पार्क में धरना दिया. वहीं, हरीश रावत ने 1 घंटे का मौन व्रत भी रखा.
आपको बता दे, विपक्ष का मानना है की राज्य की विधानसभा ने मलिन बस्तियों को लेकर एक कानून पारित किया था, जिसमें साल 2016 से पहले बसी बस्तियों को वर्गीकृत किया गया था. उसमें ये कहा गया था कि इन बस्तियों में बसे लोगों को मालिकाना हक दिया जाएगा, लेकिन अब देहरादून में उनको भी उजाड़ने की प्रयास किए जा रहे हैं.अब तक सभी विपक्षी दल जो अलग अलग होकर सरकार के खिलाफ हल्ला बोलते हुए नज़र आ रहे थें, अब इंडिया गठबंधन के जरिये सरकार को घेरने के लिए प्रयास करते दिखाई पड़ रहे है.जिस पर भारतीय जनता पार्टी इंडिया गठबंधन पर तंज कसती नजर आ रही है.
कुल मिला कर मलिन बस्तियों को मालिकाना हक देने व राज्य के भूमिहीनों और आपदाग्रस्त गांवो के पुनर्वास जैसे मुद्दे शामिल कर हरीश रावत द्वारा 1 घंटे का मौन व्रत एक बार फिर रखा गया, साथ ही इंडिया गठबंधन के नेताओं ने आरोप भी लगाया है. कि सरकार ऐसी तमाम जमीनों को पूंजीपतियों को लीज़ में देने और बस्तियों को उजाड़ने का काम कर रही है. बरहाल यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि प्रदेश की जनता किस पार्टी को आगामी विधानसभा चुनावों में जीत का ताज़ पहनाती नज़र आएगी, या आज हरीश रावत का मौन व्रत का फल भविष्य में कांग्रेस और इन्डिया गठबंधन को बड़ी सफलता 2027 में दिलाने में कामयाब रहेगा भी की नहीं.