KNEWS DESK – अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच पश्चिम एशिया में नई सामरिक हलचल देखने को मिल रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन ईरान को अपनी उन्नत सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल CM-302 बेचने के करीब है। यह संभावित रक्षा समझौता ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका ने ईरानी समुद्री तट के पास अपनी नौसैनिक मौजूदगी बढ़ा दी है।
अमेरिकी नौसेना के दो प्रमुख एयरक्राफ्ट कैरियर USS Abraham Lincoln और USS Gerald R. Ford क्षेत्र में तैनात हैं, जिससे हालात और संवेदनशील हो गए हैं।
CM-302: कितनी घातक है यह मिसाइल?
CM-302 एक सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता लगभग 290 किलोमीटर बताई जाती है। इसे कम ऊंचाई पर अत्यधिक गति से उड़ान भरते हुए दुश्मन के जहाजों के रडार और डिफेंस सिस्टम को चकमा देने के लिए डिजाइन किया गया है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मिसाइल ईरान के बेड़े में शामिल होती है, तो फारस की खाड़ी और आसपास के समुद्री इलाकों में शक्ति संतुलन बदल सकता है। सुपरसोनिक गति के कारण इसे रोकना पारंपरिक मिसाइल रक्षा प्रणालियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
डील पर कब से चल रही है बातचीत?
समाचार एजेंसी Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान पिछले दो वर्षों से इस डील को अंतिम रूप देने के प्रयास में था। पिछले साल बातचीत अंतिम चरण में पहुंचने पर ईरान के वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों ने चीन का दौरा भी किया था।
ईरानी विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि तेहरान अपने सहयोगियों के साथ सुरक्षा और सैन्य समझौतों को सक्रिय रूप से आगे बढ़ा रहा है।
ट्रंप की सख्त चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को परमाणु समझौते को लेकर कड़ा संदेश दिया है। व्हाइट हाउस की ओर से संकेत दिया गया है कि या तो समझौता होगा, या फिर अमेरिका “कड़े कदम” उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चीन–ईरान मिसाइल डील आगे बढ़ती है, तो यह अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए रणनीतिक चुनौती बन सकती है। साथ ही, यह संयुक्त राष्ट्र के हथियार प्रतिबंध से जुड़े सवाल भी खड़े कर सकती है।
इजरायल के पूर्व खुफिया अधिकारियों समेत कई रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि ईरान को सुपरसोनिक एंटी-शिप क्षमता मिलने से क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा समीकरण बदल सकते हैं।