शिक्षा निदेशक की पिटाई,सियासत गरमाई ! 

उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, प्रदेश में कानून व्यवस्था से लेकर आम जनता की सुरक्षा को लेकर विपक्ष धामी सरकार पर हमला वार है,वही अब प्राथमिक शिक्षा निदेशक मारपीट मामला तूल पकड़ता जा रहा है.अब इस मामले में विधायक उमेश शर्मा काऊ के गनर की एंट्री हो गई है. उमेश शर्मा काऊ के गनर की शिकायत के आधार थाना रायपुर में अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है. बता दें विधायक उमेश शर्मा काऊ के गनर कांस्टेबल सुशील रमोला ने शिकायत दर्ज कराई है, कि रायपुर विधायक शनिवार की दोपहर को अपने विधायक क्षेत्र में ननूरखेड़ा शिक्षा निदेशालय आए,उनकी सुरक्षा में पीड़ित सुरक्षाकर्मी कांस्टेबल सुशील रमोला और कांस्टेबल सुधीर बहुगुणा साथ में थे. जिसमें स्थल क्षेत्र में रायपुर में खुले विद्यालय का नाम निशुल्क भूमि दान करने वालों के नाम पर करवाने के लिए अपने दिए पत्र के क्रम में प्रगति पूछने और शासन को भेजे पत्र की प्रति दिखाने और मांगने पर इनके साथ मौजूद लोगों ने शोरगुल करना शुरू कर दिया. ये प्राय: इनके साथ बैठे रहते हैं. इनके द्वारा शुक्रवार को भूमि दान करने वाले लोगों से दुर्व्यवहार किया गया. शनिवार को भी इनके एक व्यक्ति ने जिसने हाफ जैकेट पहनी थी उसके द्वारा  फोन उठाकर विधायक की तरफ मारा. जिससे हम लोग बीच बचाव करने लगे. फोन विधायक के कंधे से लग कर नीचे गिरा. जिसके बाद वाद विवाद बढ़ गया.अब इस मामले ने राजनीति तूल पकड़ लिया है,विपक्षी दल इस घटनाओ को लेकर धामी सरकार पर लगतार कर्मचारियों की सुरक्षा के साथ भाजपा विधायक पर गुंडागर्दी करने का आरोप लगा रहे है. और भाजपा विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप।

प्रारंभिक शिक्षा निदेशक कार्यालय में सरकारी कार्य में बाधा डालने, मारपीट और तोड़फोड़ के आरोप में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है. घटना में शामिल हिस्ट्रीशीटर समेत 4 आरोपियों को थाना रायपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया है. पुलिस द्वारा चारों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज गया है.उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर उबाल आ गया है. प्रारंभिक शिक्षा निदेशक पर हुए कथित हमले का मामला अब केवल विपक्षी दलों के आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि सत्तारूढ़ भाजपा के भीतर से भी कार्रवाई की मांग उठने लगी है. वायरल तस्वीरों और वीडियो ने इस पूरे प्रकरण को और गंभीर बना दिया है, जिससे सरकार, संगठन और प्रशासन तीनों पर दबाव बढ़ गया है.सभी अपनी अपनी सफाई देते नज़र आ आ रहे है.

मामला प्रारंभिक शिक्षा निदेशक अजय कुमार नौडियाल से जुड़ा है, जिनके साथ कथित मारपीट की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं. इस घटना की जिम्मेदारी भाजपा विधायक उमेश शर्मा काऊ पर डाली जा रही है. घटना के बाद से ही विधायक चौतरफा घिरे हुए हैं. विपक्षी दल कांग्रेस जहां उनकी तत्काल गिरफ्तारी की मांग कर रहा है, वहीं भाजपा संगठन ने भी विधायक से जवाब तलब कर लिया है.साथ ही सभी विपक्षी दल अब बढ़ते अपराधों के साथ विधायक की गिरफ़्तारी की मांग कर रहे है.

 

ये प्रकरण भाजपा के लिए अंदरूनी तौर पर ज्यादा चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है. विपक्ष के आरोपों का सामना करना तो राजनीति का हिस्सा है, लेकिन जब पार्टी के भीतर से ही आवाज उठने लगे, तो मामला गंभीर हो जाता है. खासतौर पर तब, जब घटना एक वरिष्ठ अधिकारी से जुड़ी हो और उसकी तस्वीरें सार्वजनिक मंच पर मौजूद हो.फिलहाल पूरा मामला उत्तराखंड की राजनीति का केंद्र बन चुका है. एक तरफ कांग्रेस इसे कानून व्यवस्था का मुद्दा बनाकर सरकार को घेर रही है, वहीं भाजपा संगठन अपनी छवि को नुकसान से बचाने की कोशिश में है. आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी नेतृत्व इस मामले में कितना सख्त रुख अपनाता है और क्या वाकई कोई ठोस कार्रवाई होती है, या फिर यह विवाद भी राजनीतिक बयानबाजी की भेंट चढ़ जाएगा.

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