सोनम वांगचुक की रिहाई पर केंद्र का सुप्रीम कोर्ट में इनकार, 24 बार हेल्थ चेकअप का दिया हवाला

डिजिटल डेस्क- लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की रिहाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने साफ किया है कि स्वास्थ्य आधार पर उन्हें रिहा करना संभव नहीं है। बुधवार को हुई सुनवाई में केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि वांगचुक की अब तक कुल 24 बार स्वास्थ्य जांच कराई जा चुकी है और वह पूरी तरह फिट हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिए गए वांगचुक की पत्नी गीतांजलि ने उनकी हिरासत को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में वांगचुक की बिगड़ती सेहत और उम्र का हवाला देते हुए रिहाई की मांग की गई है। हालांकि केंद्र सरकार ने अदालत में कहा कि उन्हें नियमित और सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

पाचन संबंधी दिक्कतों का किया जा रहा इलाज

सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि वांगचुक को कुछ पाचन संबंधी दिक्कतें जरूर थीं, लेकिन उनका इलाज किया जा रहा है और उनकी स्थिति स्थिर है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस मामले पर गंभीरता से विचार किया है, लेकिन केवल स्वास्थ्य के आधार पर रिहाई की अनुमति नहीं दी जा सकती। इससे पहले सोमवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा था कि वह वांगचुक की उम्र और सेहत को देखते हुए हिरासत के फैसले पर पुनर्विचार करे। अदालत ने सरकार से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी थी।

26 सितंबर को लिया गया था हिरासत में

हालांकि केंद्र ने तब भी यही रुख दोहराया था कि वांगचुक की सेहत ठीक है और उन्हें जोधपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) से बेहतर इलाज मिल रहा है। सोनम वांगचुक फिलहाल जोधपुर केंद्रीय जेल में बंद हैं। उन्हें पिछले साल 26 सितंबर को हिरासत में लिया गया था। गिरफ्तारी से दो दिन पहले लद्दाख को राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों में हिंसा भड़कने और चार लोगों की मौत के मामले में सरकार ने उन पर गंभीर आरोप लगाए थे।

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