बजट के बाद सोना-चांदी हुआ धड़ाम, कीमतों में इतनी बड़ी गिरावट कि भाव सुनकर नाच उठेंगे आप!

KNEWS DESK – बजट 2026 के दिन जहां संसद में आर्थिक दिशा तय हो रही थी, वहीं कमोडिटी बाजार में सोने-चांदी ने निवेशकों को जोर का झटका दे दिया। लगातार दूसरे दिन की भारी गिरावट ने बाजार का पूरा मूड बदल दिया है। कुछ दिन पहले तक रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच चुके सोना और चांदी, 1 फरवरी को बजट पेश होते ही वायदा बाजार में बुरी तरह टूटते नजर आए। इस अचानक आई गिरावट ने न सिर्फ निवेशकों, बल्कि आम खरीदारों को भी हैरान कर दिया है।

दो दिनों में उलट गई तस्वीर

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) के आंकड़े इस गिरावट की गंभीरता को साफ दिखाते हैं। 29 जनवरी को चांदी जहां 4.01 लाख रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर पर थी, वहीं अब यह फिसलकर करीब 2.66 लाख रुपये प्रति किलो पर आ गई है। यानी महज दो दिनों में चांदी करीब 1.36 लाख रुपये सस्ती हो गई।

सोने का हाल भी कुछ ऐसा ही रहा। 29 जनवरी को वायदा बाजार में 1.69 लाख रुपये तक पहुंचने वाला सोना अब करीब 1.38 लाख रुपये के आसपास कारोबार कर रहा है। वहीं 10 ग्राम सोने का भाव गिरकर करीब 1.46 लाख रुपये पर आ गया है। सिर्फ दो दिनों में सोने के दाम में 30 हजार रुपये से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि 1 फरवरी को सर्राफा बाजार बंद रहा, लेकिन उससे एक दिन पहले यानी 30 जनवरी को भी सोना करीब 9,500 रुपये और चांदी लगभग 40 हजार रुपये सस्ती हो चुकी थी। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोना 1.65 लाख रुपये और चांदी 3.39 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर पर आ गई थी।

गिरावट के पीछे क्या हैं बड़े कारण?

इस तेज गिरावट के पीछे दो अहम वजहें मानी जा रही हैं। पहली वजह है जोरदार प्रॉफिट बुकिंग। बीते दिनों सोने-चांदी के दाम ऑल टाइम हाई पर थे। ऐसे में निचले स्तर पर खरीदारी करने वाले निवेशकों ने मुनाफा वसूलने के लिए बिकवाली शुरू कर दी। दूसरी वजह फिजिकल डिमांड में कमी है। ऊंची कीमतों के चलते आम ग्राहकों और ज्वेलरी इंडस्ट्री की मांग कमजोर पड़ गई, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया।

मार्जिन बढ़ने से कैसे टूटा बाजार?

इस गिरावट की सबसे बड़ी तकनीकी वजह मार्जिन मनी में बढ़ोतरी को माना जा रहा है। सेबी रजिस्टर्ड कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता के मुताबिक, शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज (CME) ने कॉपर के बाद अब सोने और चांदी पर भी मार्जिन बढ़ा दिया है। सोने पर मार्जिन 6% से बढ़ाकर 8% और चांदी पर 11% से बढ़ाकर 15% कर दिया गया है।

कमोडिटी बाजार में ट्रेडिंग के लिए निवेशकों को पूरी रकम नहीं, बल्कि एक तय हिस्सा मार्जिन के रूप में जमा करना होता है। जब एक्सचेंज मार्जिन बढ़ाता है, तो ट्रेडर्स को अपनी मौजूदा पोजीशन बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पैसा लगाना पड़ता है। कई ट्रेडर्स के पास तुरंत अतिरिक्त कैश नहीं होता, ऐसे में वे मजबूरी में अपनी पोजीशन काटते हैं। जब एक साथ बड़े पैमाने पर बिकवाली होती है, तो कीमतें तेजी से टूटने लगती हैं।

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