KNEWS DESK- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जीव मात्र का समग्र कल्याण ही मानवता का पहला लक्ष्य है। जियो और जीने दो हमारे जीवन का शाश्वत दर्शन है। हमारे यहां नैतिक शिक्षा, राष्ट्रभक्ति और संस्कारयुक्त जीवन पद्धति की एक लंबी परम्परा रही है। यह हम भारतीयों का स्व-अनुशासन ही है, जिससे भारत आज विश्व की महाशक्ति के रूप में तैयार हो रहा है। उन्होंने कहा कि हम सब उस भारतीय मातृ सत्तात्मक संस्कृति के संवाहक है, जहां माताओं और बहनों को देवी के रूप में पूजा जाता है। हमारे यहां बच्चा-बच्चा भी भारत माता की जय बोलकर राष्ट्रमाता को सम्मान देता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुजरात के राजकोट जिले के प्रांसला के समीप उपलेटा में वैदिक मिशन ट्रस्ट द्वारा आयोजित 26वें ‘राष्ट्रकथा शिविर‘ को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शिविर में सहभागिता कर ट्रस्ट के गुजरात के प्रमुख व महान विचारक स्वामी धर्मबंधु जी महाराज का आशीर्वाद लिया और कहा कि हम सभी को अपने जीवन में हमेशा अच्छा करने का प्रयास करना चाहिए। पूज्य स्वामी जी ने हम सबको नई जीवन दृष्टि दी है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किताबी ज्ञान से व्यवहारिक और वास्तविक ज्ञान बेहतर है और हमारी युवा पीढ़ी को उनकी असीम शक्तियों का भान कराना भी बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि नेकी, परमार्थ और राष्ट्रभक्ति का सहज भाव शरीर में रक्त की तरह हम सभी में प्रवाहमान होना चाहिए। ‘वसुधैव कुटुम्बकम‘ हमारी संस्कृति का जीवोमूल लक्ष्य है और हमें इसी दिशा में और भी मजबूती से आगे बढ़ाना चाहिए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि द्वादश ज्योतिर्लिंगों में श्री सोमनाथ धाम भी शामिल है। देश में सनातन संस्कृति की धारा सभी क्षेत्रों में बह रही है। राष्ट्रकथा शिविर में स्वामीजी ने देश के विभिन्न प्रांतों से शामिल हुई युवा शक्ति को राष्ट्र के विकास के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश फिर से विश्वगुरु बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। गुरु की महिमा को देखेंगे तो गुरु हमें अंधकार से प्रकाश की ओर लेकर जाते हैं। भारत ने हजारों वर्षों से दुनिया को विश्व बंधुत्व का संदेश दिया है। भारतीय परिवारों में मां का अपना अलग ही स्थान होता है। मां ही हम सभी की पहली गुरु होती हैं। दुनिया में सभी देश अपनी गौरवशाली संस्कृति पर गर्व करते हैं, लेकिन अन्य किसी भी देश में मातृ संस्कृति का आधार देखने को नहीं मिलता।