डॉलर के मुकाबले रुपए में 96 पैसे की जोरदार तेजी, छह महीने का रिकॉर्ड टूटा

आरबीआई के नए कदमों का दिखने लगा असर, सोमवार को 95.75 के स्तर पर बंद हुई भारतीय करेंसी। डॉलर की मांग और रुपए में सट्टेबाजी पर लगाम लगाने के लिए केंद्रीय बैंक ने बदले कई नियम।

Knews Desk – भारतीय मुद्रा रुपए ने सोमवार को शानदार वापसी करते हुए डॉलर के मुकाबले छह महीने से अधिक समय की सबसे बड़ी एकदिनी बढ़त दर्ज की। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 96 पैसे मजबूत होकर 95.75 के अस्थायी स्तर पर बंद हुआ। इससे पहले इतनी बड़ी एकदिनी तेजी 2 अप्रैल को देखने को मिली थी। उस दिन रुपया डॉलर के मुकाबले 166 पैसे मजबूत हुआ था।

रुपए में आई इस तेजी के पीछे भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से हाल ही में उठाए गए कदमों को प्रमुख वजह माना जा रहा है। केंद्रीय बैंक ने विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की मांग को नियंत्रित करने और रुपए के खिलाफ सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से कई नियमों में बदलाव किए हैं। इन फैसलों का असर सोमवार को करेंसी मार्केट में दिखाई दिया।

इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.61 के स्तर पर खुला। कारोबार के दौरान यह मजबूत होकर 95.57 के उच्चतम स्तर तक पहुंचा, जबकि इसका निचला स्तर 95.96 रहा। अंत में रुपया 95.75 के अस्थायी स्तर पर बंद हुआ। पिछले कारोबारी सत्र में शुक्रवार को रुपया 17 पैसे की बढ़त के साथ 96.71 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

रुपए में गिरावट को थामने के लिए आरबीआई ने शनिवार को विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव्स कारोबार से संबंधित नियमों को सख्त किया। इसका उद्देश्य करेंसी मार्केट में रुपए के खिलाफ सट्टेबाजी को कम करना और डॉलर की मांग पर नियंत्रण रखना है। केंद्रीय बैंक ने बैंकों को यह भी निर्देश दिया कि 20 लाख अमेरिकी डॉलर से अधिक की डॉलर खरीद के लिए उन्हें 20 प्रतिशत का रिजर्व बनाना होगा।

इसके अलावा, आरबीआई ने विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव्स से जुड़े अनुबंधों को दोबारा बुक करने के नियमों में भी बदलाव किया। नए निर्देशों के अनुसार, अधिकृत डीलर ग्राहकों को भारतीय रुपए से जुड़े ऐसे विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव्स अनुबंधों को फिर से बुक करने की अनुमति नहीं देंगे, जिन्हें पहले रद्द किया जा चुका है। यह नियम डिलीवरेबल और नॉन-डिलीवरेबल, दोनों प्रकार के अनुबंधों पर लागू होगा।

बाजार के जानकारों का मानना है कि इन फैसलों से स्पॉट मार्केट में डॉलर की मांग कम हो सकती है। इसके साथ ही, रुपए के खिलाफ बनाई जाने वाली अत्यधिक सट्टा पोजीशन पर भी रोक लगने की उम्मीद है। आरबीआई ने तेल विपणन कंपनियों के लिए चुनिंदा बैंकों के माध्यम से विशेष डॉलर सुविधा और कुछ विदेशी मुद्रा हेजिंग लेनदेन को महंगा करने जैसे कदम भी उठाए हैं।

हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक, रुपए में मजबूती कितने समय तक बनी रहती है, यह कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी पूंजी के प्रवाह और वैश्विक बाजारों की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

डॉलर, कच्चे तेल और शेयर बाजार का हाल

रुपए में तेजी के बीच सोमवार को डॉलर इंडेक्स में बढ़त दर्ज की गई। छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति बताने वाला डॉलर इंडेक्स 0.17 प्रतिशत बढ़कर 102.38 पर कारोबार कर रहा था।

वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी इजाफा देखने को मिला। ब्रेंट क्रूड का वायदा भाव 0.94 प्रतिशत बढ़कर 105.70 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

घरेलू शेयर बाजार में इसके विपरीत गिरावट रही। सेंसेक्स 547.65 अंक टूटकर 71,924.68 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 157.10 अंक गिरकर 22,363.35 के स्तर पर आ गया।

एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में शुद्ध रूप से 3,568.90 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे।

विदेशी मुद्रा भंडार में भी आई बड़ी गिरावट

रिजर्व बैंक की ओर से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, 2 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 12.952 अरब डॉलर घटकर 734.606 अरब डॉलर रह गया। इससे पहले 25 सितंबर को समाप्त सप्ताह में भी विदेशी मुद्रा भंडार में 18.343 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी, जिसके बाद कुल भंडार 747.557 अरब डॉलर पर आ गया था।

इस तरह, आरबीआई के हालिया फैसलों के बाद रुपए को तत्काल राहत जरूर मिली है, लेकिन आगे इसकी दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय बाजार, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेश के रुझान पर निर्भर करेगी।

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