दिल्ली में यमुना नदी पर दूर तक नजर आने वाला सफेद झाग देखने में भले ही किसी बर्फ की चादर जैसा दिखाई देता हो, लेकिन इसकी असली तस्वीर बेहद चिंताजनक है। यह झाग नदी में बढ़ते प्रदूषण और खराब होते हालात की गवाही दे रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, दिल्ली में निकलने वाले 60 फीसदी से ज्यादा सीवेज का अब भी सही तरीके से ट्रीटमेंट नहीं हो पाता। पर्याप्त संसाधनों की कमी के चलते गंदा पानी सीधे यमुना में पहुंच रहा है, जिससे राजधानी की जीवनदायिनी कही जाने वाली यह नदी लगातार प्रदूषण की चपेट में आ रही है।
Knews Desk- दिल्ली की यमुना इन दिनों एक ऐसी “सफेद चादर” ओढ़े नजर आ रही है, जिसे देखकर पहली नजर में लग सकता है कि राजधानी में सर्दियों का कोई बर्फीला नजारा उतर आया है। दूर-दूर तक फैला झाग ऐसा एहसास कराता है मानो अंटार्कटिका या अलास्का के ग्लेशियरों के बीच कोई नदी बह रही हो और उसमें बर्फ के बड़े-बड़े टुकड़े तैर रहे हों।
लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू बेहद डराने वाला है। ये बर्फ नहीं, बल्कि प्रदूषण का झाग है, जो यमुना की बिगड़ती हालत की गवाही दे रहा है। जिस नदी में कभी साफ पानी की लहरें दिखाई देती थीं, वहां अब जहरीले रसायनों और गंदगी से बने झाग की परत नजर आ रही है। यानी दिल्ली को “बर्फीले नजारे” के लिए हजारों किलोमीटर दूर जाने की जरूरत नहीं.. बस यमुना किनारे पहुंच जाइए। फर्क सिर्फ इतना है कि यहां ग्लेशियर नहीं, प्रदूषण की सफेद चादर तैर रही है।
आस्था की डुबकी या केमिकल वाला स्नान ?

ये वही यमुना है, जिसके किनारे छठ पूजा के दौरान लाखों श्रद्धालु जुटते हैं, इसी पानी में खड़े होकर सूर्य देव को जल अर्पित करते हैं और इसे मां का दर्जा देते हैं। इस बार तो कई मंत्रियों ने भी यमुना में डुबकी लगाकर खूब सुर्खियां बटोरीं, लेकिन क्या यमुना अब सच में नदी बची भी है या सिर्फ दिल्ली की इंडस्ट्रीज़ का ड्रेन बन कर रह गई है?
हैरानी की बात ये है कि बारिश के बाद उम्मीद थी कि नदी का पानी कुछ साफ होगा, लेकिन यमुना की हालत सुधरने के बजाय और डराने वाली तस्वीर दिखा रही है, सफेद झाग की चादर में ढकी नदी दूर से बर्फीले मैदान जैसी लगती है।
आखिर यमुना में तैरता ये झाग है क्या ?

यमुना में तैरता सफेद झाग सिर्फ पानी की सतह पर जमा कोई सामान्य फोम नहीं है, बल्कि यह नदी में मौजूद हानिकारक केमिकल का नतीजा है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, झाग का मुख्य कारण सीवेज में मौजूद फॉस्फेट, डिटर्जेंट, केमिकल और इंडस्ट्रियल स्लज की वजह से बनता है। जब अन्ट्रीटेड वाटर सीधा यमुना में पहुंचता है, तो वह पानी में बुलबुले बनाकर झाग की मोटी परत तैयार कर देते हैं।
एक्सपर्ट बताते हैं कि 60 प्रतिशत से ज्यादा दिल्ली का जो सीवेज है, वो कभी ट्रीट ही नहीं किया जाता, क्योंकि दिल्ली के पास ऐसी टेक्नोलॉजी उपलब्ध नहीं है, जो पूरे सीवेज को ट्रीट कर पाए. नजफगढ़ और शाहदरा जैसे बड़े नालों का बड़ी मात्रा में प्रदूषित पानी यमुना में सीधा उतार दिया जाता हैं। दिल्ली में इतने स्लम्स हैं, दिल्ली में इतनी झुग्गी झोपड़ियां हैं, अनऑथराइज्ड घर हैं, जिनका कोई रिकॉर्ड ही नहीं है, जहां का अनट्रीटेड सीवेज सीधा यमुना में छोड़ दिया जा रहा है.
यमुना की सफाई के लिए आवंटित हुए 2500 करोड़ से ज्यादा
जब सरकारी आंकड़े पता किए गए तो पता चला कि पिछले 10 साल में कई सरकारें आईं, कई सरकारें गई, लगभग ढाई हजार करोड़ रुपये से ज्यादा यमुना की साफ सफाई के लिए आवंटित हुआ. साफ-सफाई के अभियान भी चले, पर स्थिति आज वैसी ही बनी हुई है. यमुना है, पर यमुना को ढूंढना पड़ेगा. इस यमुना को जहरीले झाग से बचाना होगा. ?

जांच में सामने आई कमियां, 37 में से 9 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट सही तरीके से नहीं कर रहे काम
दिल्ली के सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से बिना ट्रीटमेंट के पानी सीधे यमुना में छोड़े जाने का कोई आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है। हालांकि, जांच रिपोर्ट में यह जरूर सामने आया है कि कई STP सीवेज को तय मानकों के अनुसार साफ करने में नाकाम रहे हैं। इसके चलते खराब गुणवत्ता वाला पानी यमुना नदी में पहुंचने का खतरा बना हुआ है।
लोगों की सेहत पर बढ़ा खतरा
दिल्ली में यमुना के प्रदूषित पानी का असर अब लोगों की सेहत पर भी दिखाई देने लगा है। नदी के किनारे रहने वाले लोगों का कहना है कि यमुना के पानी से बदबू, गंदगी और मच्छरों और सांस की समस्या लगातार बढ़ रही है। रिसर्च मे यमुना में लेड (Lead), क्रोमियम (Chromium), कैडमियम (Cadmium), आर्सेनिक (Arsenic) जैसे भारी धातुओं और जहरीले प्रदूषकों की जांच की गई। इसमें पाया गया कि इन प्रदूषकों की वजह से खासकर बच्चों में लंबे समय तक संपर्क रहने पर स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकता है और कुछ प्रदूषकों में कैंसर का संभावित खतरा (carcinogenic risk) भी देखा गया।
अप्रैल 2026 की रिपोर्ट में 7 STP फेल, 2 प्लांट मिले बंद
लेटेस्ट जांच रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के 37 STP में से अप्रैल 2026 में किए गए निरीक्षण के दौरान 7 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पानी की गुणवत्ता के तय मानकों पर खरे नहीं उतरे। वहीं, 2 STP या तो बंद पाए गए या फिर अपग्रेडेशन का काम चल रहा था। यानी कुल 9 STP ऐसे मिले, जो या तो मानकों पर फेल थे या फिर पूरी क्षमता से काम नहीं कर रहे थे।
इनमें यमुना विहार फेज-3, घिटोरनी, यमुना विहार फेज-1, महरौली और वसंत कुंज समेत कई STP शामिल हैं। इन प्लांट्स की खामियों के कारण यमुना में प्रदूषण का स्तर बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।