दिल्ली का विंटर एक्शन प्लान तैयार, 1 नवंबर से सख्त होंगे नियम, नॉन-BS6 वाहनों पर रोक और पार्किंग शुल्क होगा दोगुना

KNEWS DESK- राजधानी दिल्ली में हर साल सर्दियों के मौसम में बढ़ने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए राज्य सरकार ने इस बार पहले से व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को आगामी शीतकालीन मौसम के लिए विशेष “विंटर एक्शन प्लान” की घोषणा की, जिसके तहत नवंबर 2026 से फरवरी 2027 तक प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई कड़े कदम लागू किए जाएंगे।

सरकार के अनुसार, प्रदूषण बढ़ने के बाद आपातकालीन उपाय लागू करने के बजाय इस बार सभी विभागों और नागरिकों को पहले से तैयार रहने का अवसर दिया जा रहा है। योजना का उद्देश्य सर्दियों के दौरान वायु गुणवत्ता को बेहतर बनाए रखना और लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से राहत दिलाना है।

नई व्यवस्था के तहत 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक दिल्ली के बाहर पंजीकृत गैर-BS6 कमर्शियल वाहनों को राजधानी में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। सरकार का मानना है कि इससे वाहनजनित प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आएगी।

वाहनों से निकलने वाले धुएं को नियंत्रित करने के लिए प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) को अनिवार्य बनाया जाएगा। प्रस्तावित नियमों के अनुसार, वैध PUCC न रखने वाले वाहनों को दिल्ली के पेट्रोल पंपों पर ईंधन नहीं दिया जाएगा।

निजी वाहनों के उपयोग को हतोत्साहित करने के लिए सरकार ने पार्किंग शुल्क दोगुना करने का फैसला किया है। यह व्यवस्था 1 नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक लागू रहेगी। अधिकारियों का कहना है कि इससे लोग सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करेंगे और सड़कों पर वाहनों की संख्या घटेगी।

ट्रैफिक दबाव कम करने के लिए सरकारी और निजी संस्थानों में चरणबद्ध कार्य समय लागू किया जाएगा। कुछ कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की सुविधा भी दी जा सकती है, जिससे पीक आवर्स के दौरान सड़कों पर वाहनों की भीड़ कम होगी।

धूल प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए निर्माण कार्यों की निगरानी बढ़ाई जाएगी। 1 नवंबर से 31 जनवरी तक सभी निर्माण एजेंसियों को पर्यावरणीय मानकों का कड़ाई से पालन करना होगा। बड़े निर्माण स्थलों पर एंटी-स्मॉग गन और मिस्ट सप्रेशन सिस्टम लगाना अनिवार्य रहेगा।

विशेष रूप से 10 दिसंबर 2026 से 20 जनवरी 2027 के बीच प्रदूषण स्तर अधिक रहने की आशंका को देखते हुए कुछ निर्माण गतिविधियों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। हालांकि आवश्यक और सार्वजनिक हित की परियोजनाओं को छूट दी जा सकती है।

सर्दियों में कचरा, पत्तियां और अन्य सामग्री जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए सरकार ड्रोन और फील्ड टीमों की मदद से निगरानी करेगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना और अन्य दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (RWA), संस्थानों और उद्योगों से अपील की है कि वे कर्मचारियों और सुरक्षा कर्मियों के लिए खुले में आग जलाने के बजाय सुरक्षित हीटिंग व्यवस्था उपलब्ध कराएं।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि वायु प्रदूषण जैसी चुनौती से निपटने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। नागरिकों, उद्योगों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। सरकार को उम्मीद है कि समय रहते उठाए गए ये कदम सर्दियों के दौरान प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करेंगे और दिल्लीवासियों को स्वच्छ हवा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगे।

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