Knews Desk- फुकेत-दिल्ली फ्लाइट में टर्बुलेंस के दौरान विमान के अचानक 300 फीट नीचे आने की घटना के बाद एअर इंडिया ने सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है। एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस अपने 5,000 से अधिक पायलटों का अनिवार्य डोप टेस्ट कराने जा रही हैं। इस जांच का उद्देश्य पायलटों द्वारा प्रतिबंधित या साइकोएक्टिव पदार्थों के सेवन का पता लगाना है।
सूत्रों के मुताबिक, यह फैसला 4 अगस्त को फुकेत से दिल्ली आ रही फ्लाइट AI2379 के मुख्य पायलट की जांच में नशीले पदार्थ के सेवन की पुष्टि के बाद लिया गया। टर्बुलेंस के दौरान एयरबस A320 विमान अचानक करीब 300 फीट नीचे आ गया था। इस घटना में 24 लोग घायल हुए थे। विमान में चालक दल के 8 सदस्यों समेत कुल 145 लोग सवार थे।
5 हजार से ज्यादा पायलटों की जांच
टाटा ग्रुप की एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस में कुल 5,000 से ज्यादा पायलट काम करते हैं। दोनों एयरलाइंस ने अपने पायलटों को भेजे आंतरिक संदेश में बताया है कि मौजूदा नियमों के तहत प्रतिबंधित पदार्थों और दवाओं के सेवन की जांच की जाएगी।
यह डोप टेस्ट अनिवार्य होगा और इसकी प्रक्रिया गुरुवार से शुरू होने की जानकारी सामने आई है। पायलटों की जांच गुरुग्राम स्थित अकादमी, उड़ान के बाद होने वाली फ्लाइट ब्रीफिंग, एयरलाइन के कार्यालयों और संबंधित बेस पर उपलब्ध कराए गए स्थानों पर की जा सकती है।
फुकेत-दिल्ली फ्लाइट में क्या हुआ था?
4 अगस्त को फुकेत से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की फ्लाइट AI2379 वायुमंडलीय अस्थिरता यानी टर्बुलेंस की चपेट में आ गई थी। इसके चलते विमान अचानक लगभग 300 फीट नीचे चला गया। घटना में 24 यात्रियों के घायल होने की जानकारी सामने आई थी।
बाद में फ्लाइट के मुख्य पायलट की जांच की गई। सूत्रों के अनुसार, टेस्ट में साइकोएक्टिव पदार्थ के सेवन की पुष्टि हुई और गांजा लेने की बात सामने आई।
सुरक्षा मानकों को मजबूत करने की कोशिश
एअर इंडिया की ओर से सभी पायलटों का डोप टेस्ट कराने का फैसला यात्रियों और अन्य हितधारकों का भरोसा बनाए रखने के साथ-साथ उड़ान सुरक्षा के मानकों को और मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। एयरलाइन का फोकस यह सुनिश्चित करना है कि विमान संचालन में शामिल कोई भी पायलट प्रतिबंधित या नशीले पदार्थों के प्रभाव में ड्यूटी न करे।