Knews Desk– भारत में हर साल प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की खबरें सामने आती रहती हैं, लेकिन चीन में ऐसा होना लगभग नामुमकिन माना जाता है. इसकी सबसे बड़ी वजह है वहां की सबसे अहम परीक्षा Gaokao, जिसकी सुरक्षा किसी सैन्य अभियान से कम नहीं होती. करोड़ों छात्रों के भविष्य से जुड़ी इस परीक्षा को लेकर चीन सरकार इतनी सख्ती बरतती है कि पेपर बनाने से लेकर परीक्षा खत्म होने तक हर कदम पर हाई सिक्योरिटी लागू रहती है.
3 महीने पहले शुरू हो जाती है तैयारी
Gaokao परीक्षा चीन की राष्ट्रीय कॉलेज प्रवेश परीक्षा है, जिसमें हर साल करीब 1 करोड़ से ज्यादा छात्र शामिल होते हैं. यह परीक्षा चीन के टॉप विश्वविद्यालयों में एडमिशन का सबसे बड़ा रास्ता मानी जाती है. यही वजह है कि इसकी तैयारी परीक्षा से करीब तीन महीने पहले शुरू हो जाती है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, टेस्ट पेपर तैयार करने के लिए सेकेंडरी स्कूलों और यूनिवर्सिटीज़ से चुनिंदा शिक्षकों का चयन किया जाता है. इन शिक्षकों को बीजिंग या अन्य सुरक्षित स्थानों पर एक साथ रखा जाता है, जहां उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाती है.
शिक्षकों को इंटरनेट तक इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं
पेपर तैयार करने वाले शिक्षकों के लिए बेहद सख्त नियम बनाए जाते हैं. उन्हें इंटरनेट इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होती. मोबाइल फोन पूरी तरह प्रतिबंधित रहते हैं और केवल लैंडलाइन टेलीफोन के इस्तेमाल की इजाजत दी जाती है.
इतना ही नहीं, शिक्षकों को सीक्रेसी बनाए रखने की विशेष ट्रेनिंग दी जाती है. परीक्षा खत्म होने तक उन्हें उस सुरक्षित परिसर से बाहर जाने की अनुमति नहीं होती. कई बार उन्हें दूरदराज के सुरक्षित इलाकों में रखा जाता है ताकि बाहरी दुनिया से संपर्क पूरी तरह खत्म रहे.
जेलों में छपते हैं परीक्षा के पेपर
चीन में परीक्षा के प्रश्नपत्र सामान्य प्रिंटिंग प्रेस में नहीं छापे जाते. रिपोर्ट्स के अनुसार, इन्हें सरकार द्वारा तय विशेष जेल परिसरों में प्रिंट किया जाता है, जहां सुरक्षा बेहद कड़ी होती है.
पेपर प्रिंटिंग के दौरान हर कर्मचारी की निगरानी की जाती है और पूरे सिस्टम को राष्ट्रीय सुरक्षा स्तर की सुरक्षा दी जाती है. यही वजह है कि पेपर लीक की संभावना लगभग खत्म हो जाती है.
बैंक कैश वैन से ज्यादा सुरक्षा में पहुंचते हैं पेपर
जब परीक्षा के पेपर एग्जाम सेंटर तक पहुंचाए जाते हैं, तब उनका सुरक्षा स्तर बैंक में कैश ले जाने वाली गाड़ियों से भी ज्यादा होता है. पेपर ले जाने वाली गाड़ियों में GPS सिस्टम लगाया जाता है और उनके साथ भारी सुरक्षा बल तैनात रहता है.
2025 में तो चीन ने पेपर ट्रांसपोर्ट के दौरान SWAT टीम तक को तैनात कर दिया था. हर एग्जाम सेंटर पर कम से कम 8 पुलिस टीमें मौजूद रहती थीं ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी तुरंत रोकी जा सके.
परीक्षा केंद्रों के ऊपर उड़ते हैं ड्रोन
Gaokao परीक्षा वाले दिन चीन में माहौल किसी हाई सिक्योरिटी ऑपरेशन जैसा दिखाई देता है. परीक्षा केंद्रों के आसपास 500 मीटर तक ड्रोन उड़ाए जाते हैं ताकि कोई छात्र चीटिंग न कर सके.
परीक्षा हॉल के अंदर फेस स्कैनिंग, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस डिटेक्शन और CCTV कैमरों की निगरानी रहती है. कई जगह AI आधारित निगरानी सिस्टम भी लगाए गए हैं जो संदिग्ध गतिविधियों को तुरंत पकड़ लेते हैं.
AI टूल्स तक बंद कर दिए जाते हैं
चीनी सरकार केवल फिजिकल सिक्योरिटी पर ही निर्भर नहीं रहती, बल्कि डिजिटल स्तर पर भी कड़ी निगरानी रखती है. ByteDance, Tencent और Alibaba जैसी बड़ी टेक कंपनियों ने परीक्षा के दौरान अपने AI टूल्स की कई सुविधाएं बंद कर दी थीं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ByteDance के AI ऐप Doubao ने परीक्षा के दौरान सवालों के जवाब देना बंद कर दिया था. वहीं DeepSeek, Yuanbao, Qwen और Kimi जैसे AI प्लेटफॉर्म्स ने इमेज रिकग्निशन फीचर तक रोक दिया ताकि छात्र परीक्षा के सवालों की फोटो भेजकर मदद न ले सकें.
चीटिंग पर 7 साल तक की जेल
चीन में परीक्षा में चीटिंग को बेहद गंभीर अपराध माना जाता है. वहां Gaokao में नकल करते पकड़े जाने पर छात्रों को 7 साल तक की जेल हो सकती है. यही वजह है कि छात्र भी परीक्षा के दौरान नियम तोड़ने से डरते हैं. इस पूरी प्रक्रिया में चीन के शिक्षा मंत्रालय, पब्लिक सिक्योरिटी मंत्रालय, नेशनल सिक्योरिटी एजेंसियां, इंटरनेट रेगुलेटर, स्टेट सीक्रेट्स प्रोटेक्शन विभाग और यहां तक कि सुप्रीम पीपुल्स कोर्ट तक शामिल रहता है.
यही कारण है कि चीन में Gaokao केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मिशन माना जाता है.