Knews Desk- कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से सबसे ज्यादा फायदा उन कंपनियों को मिलता है, जिनकी उत्पादन या संचालन लागत में पेट्रोलियम उत्पादों की बड़ी हिस्सेदारी होती है। एयरलाइंस के लिए विमान ईंधन यानी ATF की लागत काफी महत्वपूर्ण होती है। इसी तरह पेंट और टायर कंपनियों के उत्पादन में पेट्रोकेमिकल आधारित कच्चे माल का इस्तेमाल होता है। ऐसे में कच्चा तेल सस्ता होने पर इन कंपनियों के मार्जिन में सुधार की उम्मीद बढ़ जाती है।गुरुवार को एयरलाइन कंपनी IndiGo के शेयरों में करीब 7 फीसदी की तेजी देखी गई और इसका शेयर 5,489 रुपये के आसपास पहुंच गया। वहीं SpiceJet के शेयर भी करीब 5 फीसदी चढ़े। तेल की कीमतों में गिरावट से एयरलाइन कंपनियों को ईंधन लागत कम होने की उम्मीद रहती है, जिसका सीधा असर उनके कारोबार और मुनाफे पर पड़ सकता है।
पेंट सेक्टर में भी जोरदार खरीदारी देखने को मिली। Asian Paints के शेयर करीब 7 फीसदी तक चढ़े। इसके अलावा Indigo Paints और Berger Paints के शेयरों में भी 5 फीसदी तक की तेजी दर्ज की गई। पेंट कंपनियों के लिए कच्चे तेल से जुड़े रॉ मटेरियल की कीमतें महत्वपूर्ण होती हैं। इसलिए तेल की कीमतों में लगातार गिरावट इन कंपनियों की लागत को कम करने में मदद कर सकती है।
टायर कंपनियों के शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी। Apollo Tyres और Balkrishna Industries के शेयरों में 8 फीसदी से ज्यादा की तेजी आई। वहीं MRF के शेयर 4 फीसदी से ज्यादा चढ़े। MRF का एक शेयर करीब 1.23 लाख रुपये के स्तर पर पहुंच गया। टायर कंपनियों के लिए रबर के अलावा पेट्रोलियम आधारित सिंथेटिक रबर और अन्य कच्चे माल की कीमतें भी महत्वपूर्ण होती हैं।
सरकारी तेल कंपनियों को भी कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का फायदा मिलने की उम्मीद बढ़ी है। HPCL, BPCL और Indian Oil Corporation यानी IOC के शेयरों में 7 फीसदी तक की तेजी दर्ज की गई। हालांकि इन कंपनियों के शेयरों पर केवल कच्चे तेल की कीमतों का ही नहीं, बल्कि रिफाइनिंग मार्जिन और पेट्रोल-डीजल की कीमतों समेत कई अन्य कारकों का भी असर पड़ता है।
कच्चे तेल की कीमतों में इस गिरावट के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को लेकर बदलती परिस्थितियों को प्रमुख वजह माना जा रहा है। अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के नतीजों के बाद बाजार में यह उम्मीद बढ़ी है कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। इसी उम्मीद से तेल की कीमतों पर दबाव आया है।
अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक नीचे बनी रहती हैं तो इसका फायदा भारतीय अर्थव्यवस्था को भी मिल सकता है। इससे आयात बिल और महंगाई पर दबाव कम हो सकता है। वहीं रुपये में मजबूती आने पर विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में दिलचस्पी बढ़ने की संभावना भी बन सकती है। हालांकि, इन शेयरों में आगे की चाल कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।