ट्रंप-पुतिन की बातचीत का असर? रूस से 3 टैंकर डीजल लेकर अमेरिका रवाना, 3 साल बाद बड़ी सप्लाई

Knews Desk– रूस और अमेरिका के बीच ऊर्जा व्यापार को लेकर एक नया घटनाक्रम सामने आया है। रूस के उपप्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक के मुताबिक, रूस के प्रिमोर्स्क बंदरगाह से डीजल लेकर तीन टैंकर अमेरिका की ओर रवाना हुए हैं। इन तीनों टैंकरों में कुल 40 हजार मीट्रिक टन डीजल है। साल 2023 के बाद यह पहली बार है, जब रूस से डीजल की खेप अमेरिका भेजी जा रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटनाक्रम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच फोन पर हुई बातचीत के करीब दो सप्ताह बाद सामने आया है। माना जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन अमेरिका में ईंधन की बढ़ती कीमतों को कम करने के विकल्प तलाश रहा है। अमेरिका में मध्यावधि चुनावों को देखते हुए भी ईंधन की कीमतें एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई हैं।समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, अलेक्जेंडर नोवाक ने बताया कि तीनों टैंकर अटलांटिक महासागर के पूर्वी तट की ओर बढ़ रहे हैं। रूस के प्रत्यक्ष निवेश कोष (RDIF) ने इस सप्लाई में मदद की है। जहाजों की गतिविधियों पर नजर रखने वाली कंपनी केप्लर के अनुसार, एक टैंकर ने न्यूयॉर्क जाने का संकेत दिया था और उसके 7 नवंबर को वहां पहुंचने का अनुमान था।रूस के राष्ट्रपति भवन क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने भी पहली खेप रवाना होने की पुष्टि की। उन्होंने संकेत दिया कि आगे भी नियमित रूप से डीजल की सप्लाई जारी रह सकती है।

नोवाक के मुताबिक, अक्टूबर में अमेरिका को पांच लाख मीट्रिक टन डीजल की सप्लाई की संभावना जताई गई थी। ट्रंप ने भी रूस से तीन लाख टन से अधिक डीजल मिलने की बात कही थी। इसके बाद नवंबर में पांच लाख टन और फिर दस लाख टन डीजल भेजे जाने की योजना का जिक्र किया गया था। हालांकि, इन संभावित आपूर्तियों की वास्तविक स्थिति और समयसीमा की पुष्टि जरूरी है।तीन टैंकरों में भेजी जा रही 40 हजार टन डीजल की खेप करीब तीन लाख बैरल के बराबर बताई गई है। अमेरिका में रोजाना लगभग 40 लाख बैरल डीजल की खपत होती है। इस लिहाज से यह खेप अमेरिकी दैनिक खपत का करीब सात प्रतिशत है।

इस घटनाक्रम की यूक्रेन में आलोचना भी हुई है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इस समझौते को लेकर नाराजगी जताई। वहीं, अमेरिका में रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के कुछ नेताओं ने भी रूस के साथ ऊर्जा व्यापार को लेकर सवाल उठाए हैं।रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने से जुड़े संभावित कदमों को फिलहाल रोक दिया है। प्रस्तावित कानून के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान हो सकता है। भारत समेत अन्य देशों पर भी इसका असर पड़ने की आशंका जताई गई थी।रूस से अमेरिका के लिए डीजल की यह खेप ऐसे समय में रवाना हुई है, जब दोनों देशों के संबंध, ऊर्जा बाजार और यूक्रेन युद्ध से जुड़े मुद्दे अंतरराष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह सप्लाई दोनों देशों के ऊर्जा व्यापार में नियमित बदलाव का संकेत बनती है या फिर इसे सीमित आपूर्ति तक ही रखा जाता है।

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