PM मोदी की सेशेल्स यात्रा के बीच जानिए भारत के सबसे गुप्त विदेशी मिशन की कहानी

Knews Desk- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों सेशेल्स की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं, जहां वे देश की आजादी की 50वीं वर्षगांठ समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। भारत और सेशेल्स के रिश्ते दशकों पुराने हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि एक समय ऐसा भी आया था जब भारत ने एक गुप्त मिशन चलाकर इस छोटे द्वीपीय देश को तख्तापलट से बचाया था। इस मिशन का नाम था ‘ऑपरेशन फ्लावर्स आर ब्लूमिंग’

सेशेल्स को 29 जून 1976 को ब्रिटेन से आजादी मिली थी, लेकिन स्वतंत्रता के कुछ ही वर्षों बाद वहां राजनीतिक अस्थिरता शुरू हो गई। 1977 में फ्रांस-अल्बर्ट रेने ने सत्ता संभाली और इसके बाद देश कई बार तख्तापलट की साजिशों का सामना करता रहा। हिंद महासागर में अपनी रणनीतिक स्थिति के कारण सेशेल्स शीत युद्ध के दौर में कई वैश्विक शक्तियों की नजर में था।साल 1981 में ब्रिटिश-आईरिश पूर्व सैनिक माइक होअर के नेतृत्व में भाड़े के सैनिकों ने सरकार गिराने की कोशिश की थी। हालांकि यह प्रयास नाकाम रहा, लेकिन इससे सेशेल्स की सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ गईं।इसके बाद 1986 में एक और बड़ी साजिश सामने आई। इस बार देश के तत्कालीन रक्षा मंत्री ओगिल्वी बर्लोइस और कुछ सैनिकों पर सत्ता पलटने की योजना बनाने का आरोप लगा। हालात गंभीर होते देख राष्ट्रपति फ्रांस-अल्बर्ट रेने ने भारत से मदद मांगी।

तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तुरंत कार्रवाई का फैसला किया। इसी दौरान ‘ऑपरेशन फ्लावर्स आर ब्लूमिंग’ शुरू किया गया। भारत ने अपनी नौसेना के युद्धपोत आईएनएस विंध्यगिरी को सेशेल्स भेजा। आधिकारिक तौर पर जहाज में तकनीकी खराबी का हवाला देकर उसे पोर्ट विक्टोरिया में रोका गया, लेकिन इसका वास्तविक उद्देश्य संभावित तख्तापलट की साजिश रच रहे लोगों को भारत की सैन्य मौजूदगी का स्पष्ट संदेश देना था।जहाज पर मौजूद भारतीय दल ने हेलीकॉप्टर अभ्यास और कमांडो ऑपरेशन का प्रदर्शन भी किया। इन गतिविधियों ने यह संकेत दिया कि भारत जरूरत पड़ने पर तत्काल हस्तक्षेप करने की क्षमता रखता है। भारतीय नौसेना की इस रणनीतिक मौजूदगी ने साजिशकर्ताओं पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया और उनकी योजना कमजोर पड़ गई।

कुछ समय बाद जब राष्ट्रपति रेने जिम्बाब्वे में एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में थे, तब फिर से तख्तापलट की आशंका पैदा हुई। ऐसी स्थिति में राजीव गांधी सरकार ने अपना सरकारी विमान उपलब्ध कराया ताकि राष्ट्रपति तुरंत सेशेल्स लौट सकें। उनकी समय पर वापसी और भारतीय सहयोग के कारण सुरक्षा एजेंसियों ने साजिशकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया और तख्तापलट की कोशिश पूरी तरह विफल हो गई।इस पूरे अभियान में भारत ने सीधे सैन्य कार्रवाई नहीं की, बल्कि कूटनीति, रणनीतिक सैन्य उपस्थिति और त्वरित सहयोग का संतुलित इस्तेमाल किया। यही कारण है कि इस मिशन को हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सबसे सफल गुप्त रणनीतिक कार्रवाइयों में गिना जाता है।’ऑपरेशन फ्लावर्स आर ब्लूमिंग’ के बाद भारत और सेशेल्स के संबंध पहले से अधिक मजबूत हुए। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा और निगरानी जैसे क्षेत्रों में साझेदारी लगातार बढ़ी। आज भी यह मिशन इस बात का उदाहरण माना जाता है कि बिना युद्ध छेड़े भी प्रभावी रणनीति और भरोसेमंद कूटनीति के जरिए किसी मित्र देश की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

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