बारिश आते ही क्यों बन जाता है गुरुग्राम ‘तालाब’? कंक्रीट के जंगल और खराब प्लानिंग… जनता पूछ रही सवाल

गुरुग्राम में मंगलवार को भारी बारिश के बाद 8 किलोमीटर लंबा जाम लग गया था. हर साल ऐसी तस्‍वीरें आती हैं. यहां के लोग परेशान होते हैं और प्रशासन के सभी दावे फेल होते नजर आते हैं.

Knews Desk– एक घंटे की तेज बारिश में ही साइबर सिटी गुरुग्राम (Gurugram) की रफ्तार थम जाती है और कई इलाके जलमग्न हो जाते हैं. गोल्फ कोर्स रोड, इफको चौक, सिकंदरपुर और साइबर हब जैसे प्रमुख इलाकों में हर साल मानसून के दौरान जलभराव की समस्या देखने को मिलती है. करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए इंफ्रास्ट्रक्चर के बावजूद हालात क्यों नहीं बदल रहे? विशेषज्ञों के मुताबिक, गुरुग्राम में जलभराव की वजह सिर्फ भारी बारिश नहीं, बल्कि खराब प्लानिंग और प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था का खत्म होना भी है.

प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था हुई कमजोर
कभी गुरुग्राम में बारिश का पानी नजफगढ़ झील और बादशाहपुर नाले के जरिए बाहर निकल जाता था, लेकिन तेजी से हुए शहरीकरण, निर्माण कार्यों और अतिक्रमण की वजह से कई प्राकृतिक नाले या तो बंद हो गए या फिर उनका आकार काफी छोटा हो गया. नतीजा यह है कि बारिश का पानी निकलने का रास्ता नहीं बचा और हर साल मानसून में सड़कें तालाब में तब्दील हो जाती हैं. इसका सबसे ज्यादा असर आम लोगों को जाम, परेशानी और रोजमर्रा की दिक्कतों के रूप में झेलना पड़ता है.

एक घंटे की तेज बारिश में ही साइबर सिटी गुरुग्राम की रफ्तार थम जाती है और कई इलाके जलमग्न हो जाते हैं. गोल्फ कोर्स रोड, इफको चौक, सिकंदरपुर और साइबर हब जैसे प्रमुख इलाकों में हर साल मानसून के दौरान जलभराव की समस्या देखने को मिलती है. करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए इंफ्रास्ट्रक्चर के बावजूद हालात क्यों नहीं बदल रहे? विशेषज्ञों के मुताबिक, गुरुग्राम में जलभराव की वजह सिर्फ भारी बारिश नहीं, बल्कि खराब प्लानिंग और प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था का खत्म होना भी है.

प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था हुई कमजोर
कभी गुरुग्राम में बारिश का पानी नजफगढ़ झील और बादशाहपुर नाले के जरिए बाहर निकल जाता था, लेकिन तेजी से हुए शहरीकरण, निर्माण कार्यों और अतिक्रमण की वजह से कई प्राकृतिक नाले या तो बंद हो गए या फिर उनका आकार काफी छोटा हो गया. नतीजा यह है कि बारिश का पानी निकलने का रास्ता नहीं बचा और हर साल मानसून में सड़कें तालाब में तब्दील हो जाती हैं. इसका सबसे ज्यादा असर आम लोगों को जाम, परेशानी और रोजमर्रा की दिक्कतों के रूप में झेलना पड़ता है.

प्लानिंग की कमी

गुरुग्राम की इस स्‍थित‍ि के पीछे एक बात और सामने आती है क‍ि शहर में नए सेक्टर बसते गए, लेक‍िन उनके लिए अलग ड्रेनेज स‍िस्‍टम नहीं बना. पुरानी और नई लाइनें आपस में नहीं जुड़ीं. इससे समस्‍या और बढ़ती गई.  

दिल्ली-जयपुर हाईवे पर 8 किलोमीटर लंबा

गुरुग्राम में मंगलवार को हुई बारिश से हाल-बेहाल हो गया. कहीं सड़कें धंस गईं तो कहीं जलजमाव की वजह से लोगों का निकलना मुश्किल हो गया. दिल्ली-जयपुर हाईवे पर 8 किलोमीटर लंबा जाम लगा रहा, जिसके बाद हाईवे पर गाड़ियां रेंगती हुई नजर आईं. हीरो होंडा चौक, राजीव चौक और नरसिंहपुर जैसे इलाकों में भारी ट्रैफिक जाम देखा गया. प्रशासन के सारे इंतजाम धरे के धरे रह गए.

8 कि.मी तक दिल्ली-जयपुर हाईवे पर रेंगती रही गाड़िया

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, बुधवार को भी दिल्ली समेत पूरे एनसीआर में भारी बारिश का अनुमान है. मौसम विभाग ने इसके लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट भी जारी किया है. 

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