हाई बीम को लेकर बदल सकते हैं नियम, गाड़ी स्टार्ट होते ही लो बीम पर रहेगी हेडलाइट

Knews Desk- रात में ड्राइविंग के दौरान सामने से आने वाली गाड़ियों की तेज हाई बीम अक्सर वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बनती है। अचानक पड़ने वाली तेज रोशनी से कुछ सेकंड के लिए सड़क दिखाई देना मुश्किल हो जाता है और हादसे का खतरा बढ़ जाता है। इसी समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार हेडलाइट के इस्तेमाल से जुड़े नियमों में बदलाव की तैयारी कर रही है।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से प्रस्तावित नए नियमों में गाड़ियों की हेडलाइट की तीव्रता, कलर टेम्परेचर और हाई बीम के इस्तेमाल को लेकर नए मानक तय करने की बात कही गई है। मंत्रालय ने इस प्रस्ताव पर लोगों से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने पर नए नियम अगले साल अप्रैल से लागू किए जा सकते हैं।

प्रस्ताव के मुताबिक, नई गाड़ियों में हेडलाइट डिफॉल्ट रूप से लो बीम पर शुरू होगी। चालक जरूरत के अनुसार इसे हाई बीम पर कर सकेगा। खासतौर पर नए दोपहिया वाहनों में ऑटोमैटिक हेडलैंप ऑन होने पर लाइट लो बीम मोड में रहने का प्रस्ताव है। पुराने वाहनों के मौजूदा सिस्टम में फिलहाल बदलाव नहीं किया जाएगा।

60 किमी प्रति घंटे से कम स्पीड पर बजेगा अलार्म

नए प्रस्ताव में हाई बीम के इस्तेमाल को लेकर एक खास प्रावधान भी है। अगर वाहन 60 किलोमीटर प्रति घंटे से कम रफ्तार से चल रहा है और चालक हाई बीम ऑन करता है, तो वाहन में अलार्म बजने का प्रस्ताव है। इसका मकसद अनावश्यक रूप से हाई बीम के इस्तेमाल को रोकना है। 60 किमी प्रति घंटे से ज्यादा रफ्तार वाले वाहनों, खासकर हाईवे पर, यह अलार्म नियम लागू नहीं होगा।

सरकार हेडलाइट की अधिकतम तीव्रता कम करने पर भी विचार कर रही है। प्रस्ताव के अनुसार दोपहिया वाहनों की अधिकतम तीव्रता 1.5 लाख कैंडेला से घटाकर 1 लाख कैंडेला की जा सकती है। वहीं कार और अन्य चार पहिया वाहनों के लिए यह सीमा 2.25 लाख कैंडेला से घटाकर 1.5 लाख कैंडेला करने का प्रस्ताव है।

नीली-सफेद रोशनी पर भी लगाम

हेडलाइट की बहुत ज्यादा नीली-सफेद रोशनी से होने वाली चकाचौंध को कम करने के लिए कलर टेम्परेचर की अधिकतम सीमा 6,500 केल्विन रखने का प्रस्ताव है। इसके अलावा रात और खराब मौसम में बसों तथा भारी वाहनों को आसानी से पहचानने के लिए रिफ्लेक्टिव सेफ्टी टेप को अनिवार्य किए जाने की भी तैयारी है।

बिना जरूरत हाई बीम का इस्तेमाल करने पर 500 से 1,500 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। पहली बार नियम तोड़ने पर 500 रुपये और बार-बार उल्लंघन करने पर जुर्माना बढ़कर 1,500 रुपये तक पहुंच सकता है। लगातार नियम तोड़ने या हाई बीम की वजह से दुर्घटना होने की स्थिति में ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित किए जाने का प्रावधान भी हो सकता है।

हाई बीम का इस्तेमाल कब करें?

हाई बीम का इस्तेमाल मुख्य रूप से उन सड़कों पर किया जाना चाहिए जहां पर्याप्त स्ट्रीट लाइट न हो और आसपास कोई वाहन न हो। सुनसान ग्रामीण सड़क, बाहरी इलाकों की अंधेरी सड़क या ऐसी जगह जहां दूर तक सड़क देखने की जरूरत हो, वहां हाई बीम उपयोगी हो सकती है। हालांकि, सामने से वाहन आने पर तुरंत लो बीम कर देना चाहिए।

शहरों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में लो बीम का इस्तेमाल करना बेहतर है। कोहरे, बारिश या धुंध के दौरान भी हाई बीम से बचना चाहिए, क्योंकि तेज रोशनी वापस आंखों की ओर परावर्तित होकर विजिबिलिटी को और कम कर सकती है।

सरकार का मानना है कि हेडलाइट से जुड़े इन बदलावों से सड़क पर चकाचौंध कम करने और रात में होने वाले सड़क हादसों को रोकने में मदद मिल सकती है। हालांकि, अंतिम नियम लागू होने से पहले वाहन निर्माता कंपनियों की तकनीकी तैयारियों और मिले सुझावों को भी ध्यान में रखा जाएगा।

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