बिहार में हाई-स्पीड रेल परियोजना को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. दिल्ली-वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी कॉरिडोर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) रेल मंत्रालय को सौंपे जाने की जानकारी सामने आई है. इस परियोजना के पूरा होने पर बिहार के लोगों को तेज और आधुनिक रेल कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है.
Knews Desk- राष्ट्रीय हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) की ओर से दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की DPR तैयार कर रेल मंत्रालय को सौंपने की जानकारी सामने आई है. परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए वरिष्ठ तकनीकी अधिकारियों की तैनाती की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है.
केंद्र सरकार ने बजट 2026-27 में सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करने की घोषणा की थी. इनमें दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर भी शामिल हैं.
योजना के अनुसार दिल्ली से वाराणसी की दूरी हाई-स्पीड ट्रेन से करीब 3 घंटे 50 मिनट में तय की जा सकेगी. वहीं वाराणसी से सिलीगुड़ी का सफर लगभग 2 घंटे 55 मिनट में पूरा करने का लक्ष्य है. पटना से सिलीगुड़ी की यात्रा करीब 2 घंटे में पूरी होने का अनुमान है.
प्रस्तावित नेटवर्क बनने के बाद दिल्ली से पटना का सफर करीब 4 घंटे 41 मिनट और दिल्ली से सिलीगुड़ी का सफर लगभग 6 घंटे 45 मिनट में पूरा हो सकता है. हालांकि, अंतिम यात्रा समय परियोजना के स्वरूप और ट्रेन संचालन पर निर्भर करेगा.
बिहार में कहां-कहां से गुजरेगी ट्रेन?
वाराणसी से पटना होते हुए सिलीगुड़ी तक हाई-स्पीड रेल कनेक्टिविटी की योजना है. बिहार के सीमांचल क्षेत्र में रूट को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. कटिहार या अररिया-ठाकुरगंज की दिशा से रूट बनाए जाने की चर्चाएं हैं.
अंतिम DPR, सर्वे और सरकारी मंजूरी के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज जैसे जिलों को सीधे हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का लाभ मिलेगा या नहीं.
दिल्ली-वाराणसी कॉरिडोर में ये शहर शामिल
संभावित रूट में दिल्ली, नोएडा, जेवर, मथुरा, आगरा, इटावा, कानपुर, लखनऊ, रायबरेली, प्रयागराज, भदोही और वाराणसी जैसे शहर शामिल बताए जा रहे हैं. परियोजना के लिए LiDAR और कैमरा सिस्टम की मदद से हवाई सर्वे भी किया जा रहा है.
सरकार ने सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए करीब 4,000 किलोमीटर लंबाई और लगभग 16 लाख करोड़ रुपये के संभावित निवेश का अनुमान जताया है. बिहार में यह परियोजना व्यापार, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा दे सकती है.