KNEWS DESK- Amazon की स्ट्रीमिंग सेवा Prime Video एक बार फिर विवादों में घिर गई है। ऑस्ट्रेलिया में कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है, जिसमें आरोप है कि सब्सक्राइबर्स को बिना उचित सहमति के विज्ञापन आधारित मॉडल में शामिल किया गया और एड-फ्री कंटेंट के लिए अतिरिक्त शुल्क वसूला गया।
ऑस्ट्रेलिया की प्रतिस्पर्धा निगरानी संस्था Australian Competition and Consumer Commission (ACCC) ने Amazon के खिलाफ फेडरल कोर्ट में मामला दर्ज किया है। आयोग का आरोप है कि Amazon ने Prime Video सब्सक्रिप्शन मॉडल में बदलाव करते समय ग्राहकों को पर्याप्त पारदर्शिता नहीं दी।
2024 में कंपनी ने Prime Video पर विज्ञापन दिखाने का फैसला लिया, जिसके बाद यूजर्स को एड-फ्री देखने के लिए अतिरिक्त भुगतान का विकल्प दिया गया।
सब्सक्राइबर्स पर पड़ा असर
ACCC के अनुसार, नवंबर 2023 से अगस्त 2025 के बीच 10 लाख से अधिक वार्षिक Prime सब्सक्राइबर्स इस बदलाव से प्रभावित हुए। रिपोर्ट में कहा गया है कि कई ग्राहकों ने पहले ही सालाना मेंबरशिप के लिए भुगतान कर रखा था, लेकिन बाद में उन्हें विज्ञापनों के साथ कंटेंट देखने के लिए मजबूर होना पड़ा। जो यूजर्स बिना विज्ञापन सेवा जारी रखना चाहते थे, उन्हें अतिरिक्त मासिक शुल्क देना पड़ा।
अतिरिक्त शुल्क पर विवाद
जुलाई 2024 के बाद एड-फ्री अनुभव के लिए ग्राहकों को अतिरिक्त भुगतान करना पड़ा। उदाहरण के तौर पर, वार्षिक सदस्यता (A$79) के अलावा लगभग A$2.99 प्रति माह अतिरिक्त शुल्क लिया गया।
ACCC का कहना है कि यह बदलाव बिना पर्याप्त सहमति के लागू किया गया और ग्राहकों को विकल्प के रूप में इसे स्वीकार करने या सेवा डाउनग्रेड करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
रेगुलेटर का आरोप
ACCC चेयरपर्सन Gina Cass-Gottlieb के अनुसार, Amazon AU ने अपने कॉन्ट्रैक्ट में ऐसी शर्तें शामिल कीं, जिनके जरिए कंपनी को सेवा में बड़े बदलाव करने का अधिकार मिला।
आयोग का आरोप है कि इन्हीं शर्तों का इस्तेमाल करते हुए Prime Video में विज्ञापन जोड़े गए और एड-फ्री एक्सेस के लिए अतिरिक्त शुल्क लगाया गया।
Amazon की बढ़ती कानूनी मुश्किलें
यह मामला अब फेडरल कोर्ट में पहुंच चुका है, जिससे Amazon की कानूनी चुनौतियां बढ़ गई हैं। यदि आरोप साबित होते हैं, तो कंपनी को नीतियों में बदलाव और संभावित जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
Prime Video के विज्ञापन मॉडल को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब वैश्विक स्तर पर डिजिटल सब्सक्रिप्शन पॉलिसी और कंज्यूमर राइट्स की बहस को तेज कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला स्ट्रीमिंग इंडस्ट्री में सब्सक्रिप्शन मॉडल की पारदर्शिता पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है।