Knews Desk- भारत की स्टार टेबल टेनिस खिलाड़ी मनिका बत्रा ने एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय टीम में चयन न होने पर चयन प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। देश की शीर्ष महिला पैडलर ने कहा कि उन्हें टीम से बाहर किए जाने का फैसला बेहद निराशाजनक है और इसके पीछे कोई स्पष्ट कारण भी उन्हें नहीं बताया गया।
मनिका बत्रा वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय टेबल टेनिस महासंघ (ITTF) की विश्व रैंकिंग में 51वें स्थान पर हैं। इसके बावजूद टेबल टेनिस फेडरेशन ऑफ इंडिया (TTFI) द्वारा घोषित एशियन गेम्स टीम में उन्हें मुख्य स्क्वॉड में शामिल नहीं किया गया है। उन्हें रिजर्व खिलाड़ियों की सूची में स्वस्तिका घोष के साथ रखा गया है।
इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए मनिका बत्रा ने कहा कि उन्हें सिर्फ टीम से बाहर किए जाने का दुख नहीं है, बल्कि उससे भी ज्यादा निराशा इस बात की है कि चयन मानदंडों को किस तरह लागू किया गया, यह स्पष्ट नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि चयन प्रक्रिया के बारे में न तो पारदर्शिता रखी गई और न ही उन्हें उनके बाहर होने का कोई विशेष कारण बताया गया।

मनिका ने अपने बयान में यह भी कहा कि वह लंबे समय से देश के लिए प्रदर्शन करती आ रही हैं और ऐसे में इस तरह का फैसला उनके लिए मानसिक रूप से बेहद कठिन है। उन्होंने चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग करते हुए सवाल उठाया कि आखिर किन आधारों पर टीम का चयन किया गया। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मनिका बत्रा ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया और भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) से हस्तक्षेप की अपील की है। उनका कहना है कि राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के साथ न्याय होना चाहिए और चयन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और स्पष्ट होनी चाहिए।
टेबल टेनिस फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा घोषित स्क्वॉड को लेकर अब खेल जगत में भी बहस शुरू हो गई है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और स्पष्टता होना जरूरी है ताकि खिलाड़ियों का भरोसा सिस्टम पर बना रहे। फिलहाल इस मुद्दे पर फेडरेशन की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन मनिका बत्रा का यह बयान आने के बाद मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।