जिस खेत में उगते थे आलू, वहीं बना इंटरनेशनल क्रिकेट ग्राउंड; किसान का बेटा बना राष्ट्रीय कप्तान

Knews Desk- क्रिकेट में जुनून, मेहनत और सपनों की कई कहानियां सुनने को मिलती हैं, लेकिन जर्सी के किसान जिमी परचार्ड की कहानी इन सबसे अलग है। उन्होंने अपने आलू के खेत को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैदान में बदल दिया और उसी मैदान से उनका बेटा चार्ल्स परचार्ड देश की राष्ट्रीय टीम का कप्तान बनकर उभरा। आज यह मैदान सिर्फ एक स्टेडियम नहीं, बल्कि जर्सी क्रिकेट की सफलता की पहचान बन चुका है।जिमी परचार्ड का सपना साल 1977 में शुरू हुआ था। उस समय वह अपने साथी किसानों के साथ गर्मियों में खेतों में क्रिकेट खेला करते थे। हर मैच के बाद चर्चा होती थी कि काश उनका अपना क्रिकेट ग्राउंड होता। उस समय यह सिर्फ एक सपना था, लेकिन जिमी ने इसे हकीकत बनाने की ठान ली।

करीब 26 साल बाद, 2003 में जिमी ने अपने घर के पास स्थित आलू के खेत में क्रिकेट पिच बनाने की कानूनी अनुमति हासिल की। इसके बाद दो वर्षों तक लगातार मेहनत चली और आखिरकार 2005 में इस मैदान पर पहली बार क्रिकेट मैच खेला गया। शुरुआत बेहद साधारण थी। मैदान पर न पवेलियन था, न ड्रेसिंग रूम और न ही आधुनिक सुविधाएं। खिलाड़ी अपनी कारों में कपड़े बदलते थे और एक छोटे से पोर्टाकेबिन में चाय बनती थी।धीरे-धीरे स्थानीय लोगों और प्रायोजकों का सहयोग मिला। मैदान के चारों ओर बाउंड्री, साइटस्क्रीन, क्लब हाउस और अन्य सुविधाएं विकसित की गईं। इस मैदान का नाम फार्मर्स क्रिकेट ग्राउंड रखा गया। आज यह मैदान अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टीमों की मेजबानी करता है। यहां अमेरिका, वानुअतु समेत कई देशों की टीमें खेल चुकी हैं और क्लब हाउस की दीवारें उन टीमों की कैप, तस्वीरों और यादगार पलों से सजी हुई हैं।

इस मैदान का सबसे बड़ा फायदा जिमी के परिवार को मिला। उनके बेटे चार्ल्स परचार्ड बचपन से इसी मैदान पर क्रिकेट खेलते हुए बड़े हुए। पिता के साथ घंटों अभ्यास करने वाले चार्ल्स ने 2010 में जर्सी के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया और 2017 में राष्ट्रीय टीम के कप्तान बन गए। एक किसान के खेत से निकला यह खिलाड़ी पूरे देश की टीम की कमान संभालने तक पहुंच गया।चार्ल्स परचार्ड की कप्तानी में जर्सी क्रिकेट ने कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल कीं। फार्मर्स क्रिकेट ग्राउंड पर ही जर्सी ने इटली को हराकर पहली बार आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप ग्लोबल क्वालिफायर में जगह बनाई। यह जीत जर्सी क्रिकेट के इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिनी जाती है और इसमें इस मैदान की अहम भूमिका रही।

जर्सी की टीम पिछले कुछ वर्षों में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही है। टीम फिलहाल आईसीसी टी20 रैंकिंग में 29वें स्थान पर है। 2026 टी20 विश्व कप के लिए क्वालिफिकेशन के दौरान जर्सी नेट रन रेट के बेहद मामूली अंतर से मुख्य टूर्नामेंट में जगह बनाने से चूक गई थी। हालांकि, इस अभियान के दौरान टीम ने स्कॉटलैंड जैसी मजबूत टीम को हराकर अपनी क्षमता का परिचय दिया।अब जर्सी की नजर 2028 टी20 विश्व कप पर है। हाल ही में टीम ने साइप्रस में आयोजित सब-रीजनल क्वालिफायर का खिताब जीतकर अगले साल होने वाले फाइनल क्वालिफाइंग राउंड में जगह बनाई है। यदि टीम यहां भी शानदार प्रदर्शन करती है तो पहली बार टी20 विश्व कप के मुख्य टूर्नामेंट में खेलने का सपना पूरा हो सकता है।जिमी परचार्ड की कहानी इस बात का उदाहरण है कि बड़े सपनों को पूरा करने के लिए बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति और लगातार मेहनत की जरूरत होती है। एक किसान ने अपने खेत को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैदान में बदलकर न सिर्फ अपने बेटे का भविष्य संवारा, बल्कि पूरे देश के क्रिकेट को नई पहचान भी दिलाई।

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