कब है वरुथिनी एकादशी? जानें तिथि, महत्व और व्रत से जुड़ी खास बातें

KNEWS DESK- इस वर्ष वरुथिनी एकादशी का पावन व्रत 13 अप्रैल 2026, सोमवार को रखा जाएगा। वैशाख मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली यह एकादशी आध्यात्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन की तिथि सुबह 01:16 बजे शुरू होकर 14 अप्रैल को रात 01:08 बजे समाप्त होगी।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति इस व्रत को सच्चे मन और श्रद्धा के साथ करता है, उसके जीवन के कष्ट दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। इस दिन भगवान भगवान विष्णु के वराह अवतार की पूजा की जाती है, जो हमें कठिन परिस्थितियों से उबरने की प्रेरणा देते हैं।

वरुथिनी एकादशी पर करें ये शुभ कार्य

इस दिन कुछ विशेष नियमों का पालन करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान के समक्ष व्रत का संकल्प लें।
  • पूजा के दौरान पीले वस्त्र पहनें और पीले फूल व फल अर्पित करें।
  • गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए जल, छाता, जूते या मिट्टी के घड़े का दान करें।
  • अपने व्यवहार में मधुरता रखें और सभी से प्रेमपूर्वक बात करें।
  • विष्णु चालीसा या मंत्रों का जाप करते रहें।
  • शाम को तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाकर परिक्रमा करें।
  • रात में जागरण और भगवान की कथा सुनना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।

इन बातों का रखें विशेष ध्यान (क्या न करें)

एकादशी के दिन कुछ चीजों से परहेज करना जरूरी होता है ताकि व्रत का पूरा फल प्राप्त हो सके।

  • चावल का सेवन बिल्कुल न करें।
  • झगड़ा, बहस या कड़वे शब्दों से दूरी बनाए रखें।
  • लहसुन, प्याज और तामसिक भोजन से बचें।
  • किसी की निंदा या मन में नकारात्मक भाव न रखें।
  • कांसे के बर्तन में भोजन और शहद का उपयोग न करें।
  • बाल कटवाना, नाखून काटना या दाढ़ी बनाना शुभ नहीं माना जाता।
  • दिन में सोने के बजाय भक्ति और ध्यान में समय बिताएं।

व्रत में फलाहार का महत्व

एकादशी के व्रत में सही आहार का चयन बहुत जरूरी होता है। इस दिन अनाज और दालों का त्याग किया जाता है।

  • कुट्टू, सिंघाड़ा और सामा के चावल का सेवन करें।
  • साधारण नमक की जगह सेंधा नमक का उपयोग करें।
  • ताजे फल, दूध और सूखे मेवे ऊर्जा बनाए रखते हैं।
  • मखाने की खीर और उबले आलू हल्के और पौष्टिक विकल्प हैं।

व्रत का वास्तविक उद्देश्य शरीर को कष्ट देना नहीं, बल्कि उसे शुद्ध और सात्विक बनाना है। सही आहार और सकारात्मक सोच के साथ यह व्रत न केवल आध्यात्मिक लाभ देता है बल्कि मानसिक शांति भी प्रदान करता है।